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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि बेनी प्रवीन

बेनी ’प्रवीन’

  • जीवन परिचय- बेनी के तीन कवियों के उल्लेख हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रथों में मिलते हैं- बेती ग्राम (रायबरेली) निवासी बेनी, बंदीजन, लखनऊ निवासी, बेनी प्रवीन तथा असनी निवासी बने। इनमें से तीसरे बेनी की कोई स्वतंत्र काव्यकृति तो नहीं मिलती, किन्तु कुछ कवित्त-सवैये अवश्य मिलते हैं। इनमें अनुमान होता है कि इन्होंने कोई श्रृंगारकाव्य अवश्य लिखा होगा।
  • इस काल के नवरस-विवेचक आचार्यो में संक्षिप लक्षणों और सरस उदाहरण की रचना के लिए बेनी प्रवीन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बेनी बंदीजन लखनऊ असनी के रहने वाले वाजपेयी ब्राह्यण थे तथा वल्लभ-संप्रदाय के वंशीलाल के शिष्य थे।
  • रचनाएँ-… (973 more words) …

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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि का आचार्यत्व - तोष कवि

तोष

  • जीवन परिचय-संस्कृत के आचार्यों का आश्रय लेते हुए भी अपने ढंग से रस-निरूपण करने वाले इस युग के आचार्यो में तोष का नाम सबसे पहले लिया जा सकता हैं यह इलाहाबाद के निकट स्थित श्रृगवेरपुर (सिगरौर) नामक स्थान के निवासी थे तथा इनके पिता का नाम चतुर्भुज था। यह सरयूपारिण शुक्ल ब्राह्यण थे।
  • रचनाएँ-इनके दव्ारा रचित सुधानिधि, नखशिख, और विनयशतक ये तीन ग्रंथ कहे जाते हैं। इनमें आज केवल सुधानिधि (1634) ही उपलब्ध है। कुछ लोग रचना-काल संबंधी इनके दोहे के पाठभेद के आधार पर इसे 1734 ई. में रचित मानते हैं।
  • सुधानिधि- में विषय का विवेचन… (494 more words) …

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