CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 18 of 23)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) covering entire 2018 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि उजियारें

उजियारे

  • जीवन परिचय-यह वृन्दावन-निवासी सनाढ्‌य ब्राह्यण नवलशाह के पुत्र थे। इन्होंने 1780 ई. के आसपास ’जुगलरस प्रकाश’ और ’रसचन्द्रिका’ की रचना की थी। ’रसचन्द्रिका के 16 और ’जुगलरस प्रकाश’ के 12 प्रकाशों में रस-सामग्री और विभिन्न रसों का प्राय: एक-जैसा विवेचन किया गया है- अन्तर केवल इतना ही है कि ’रसचन्द्रिका’ के अंत में ’रसरोध’ शीर्षक से रस-विरोधी बातों की चर्चा ’जुगलरस प्रकाश’ की अपेक्षा अधिक हैं। विवेचन का आधार मूलत: भारत का ’नाट्‌यशास्त्र’ रहा है। इनमें प्रश्नोत्तरी की पद्धति दव्ार

… (1289 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

रीतिकाव्य में लोकजीवन

रीतिकाव्य में लोकजीवन

रीतिकाल राजाओं-सामंतों के वैभव-विलास का युग था। स्पष्टत: उनका वर्णन काव्य में प्रमुख होना ही था। परन्तु लोकजीवन से विमुख नहीं था क्योंकि कवि जीवन-जगत का गहन अनुभव रखने वाले थे। उन्होंने समाज के विस्तृत फलक का चित्रण किया है जैसे -चोर-शाह, शूर-कायर, मूर्ख-पंडित, नगर के रहने वाले -गाँव के रहने वाले, विभिन्न काम-धंधे करने वाले। विशेषत: बिहारी में तो नागरा समाज बखूबी उभरकर सामने आया है। कवियों ने पर्वो, त्यौहारों का वर्णन करके जन उल्लास को चित्रित किया है। रीतिकाल क

… (1075 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In