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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) - कुलपति मिश्र कवि

कुलपित मिश्र

  • जीवन परिचय-कुलपति आगरा-निवासी माथुर चौबे परशुराम के पुत्र थे तथा जयपुर के कूर्मवंशीय महाराज जयसिंह के आश्रय में रहते थे। मिश्रजी परशुराम मिश्र के पुत्र एवं बिहारी के भागिनेय कहे जाते हैं। ये जयपुर के महाराज रामसिंह के आश्रित थे। कहा जाता है कि प्रसिद्ध कवि बिहारी इनके मामा थे। इनका कविता काल 1660 से 1700 ई. के बीच ठहरता है।
  • रचनाएँ- इनके दव्ारा रसरहस्य, संग्रामसार, दुर्गभक्तिचन्द्रिका, मुक्तितरंगिणी तथा नखशिख- ये पांच ग्रंथ रचे हुए कहे जाते हैं। किन्तु आज इनमें प्रथम तीन ही प्राप्त हैं। इनमें संग्रामसार महाभारत के द्रोणपर्व का तथा दुर्गभक्तिचंन्द्रिका दुर्गासप्तसदी का पद्यबद्ध… (423 more words) …

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रीतिसिद्ध कवि बिहारी

कवि बिहार (रीतिसिद्ध या केवल लक्ष्यकार)

जीवन परिचय-बिहारी माथुर चौबे कहे जाते हैं। इनका जन्म सं. 1660 में वसुबा, गोविंदपुरम्‌ गाँव में, जो ग्वालियर के पास है, हुआ था। इस प्रकार इनका जन्म ग्वालियर में, बाल्यकाल बुदेलों में और तारुण्य अपनी सुसराल मथुरा में बीता था। इनके पिता का नाम कैशव था। गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध नगर जयपुर के वियात नरेश मिर्जा राजा जयसिंह के राजकवि बिहारी लाल रीतिकाल के अग्रगण्य कवियों में हैं। अनुमानत: बिहारी कवि सं. 1720 तक वर्तमान में थे। बिहारी के अनुसार आरंभ से इस काल में कवियों को तीन भागों में विभक्त… (2622 more words) …

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