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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) सोमनाथ

सोमनाथ

  • जीवन परिचय- संवाग-निरूपक रीतिकवियों में सोमनाथ अथवा शशिनाथ का स्थान भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। इनके अपने कथन के अनुसार यह ज्ञातव्य है कि यह माथुर ब्राह्यण नीलकण्ठ के पुत्र थे तथा भरतपुर के महाराज बदनसिंह के कनिष्ठ पुत्र महाराज प्रतापसिंह के आश्रय में रहते थे। इनका कविता काल 1725 से 1760 ई. के बीच ठहरता है।
  • रचनाएँ- इनके दव्ारा रचित यह 5 ग्रंथ बताये जाते हैं-रसपीयूषनिधि, श्रृंगारविलास, कृष्णलीलावती, पंचाध्यायी, सुजानविलास और माधवविनोद। इनमें कृष्णलीलावती और सुजानविलास को छोड़ सभी ग्रंथ उपलब्ध हैं।
  1. ’माधवविनोद’ संस्कृत के माधवमालती नाटक का पद्यबद्ध अनुवाद हैं।
  2. ’पंचाध्यायी’ में कृष्णभक्त कवियों के समान रासलीला… (472 more words) …

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रीतिसिद्ध कवि बिहारी के अनुसार धारा

रीतिबद्ध व रीति -मुक्त धारा (स्वच्छन्तावादी धारा)

रीतिबद्ध धारावालों को साध्य एवं साधन दोनों काव्य ही था, पर रीतिमुक्त धारा वालों का साध्य था-प्रेम और उसी की अभिव्यक्ति का साधन था-काव्य। दोनों धाराआंे के अंतर निम्न हैं-

  • प्रथम धारा का लक्ष्य ’कला’ था, उसकी उपासना में यदि ’भाव’ की हत्या भी हो जाए तो इस बात की उन्हें चिंता न होने पर दव्तीय धारा का साध्य ’भाव’ था और कला इसकी अनुगामिनी थी।
  • प्रथम की सुंदरता ’शोभा’ पर से कही जा सकती हैं तो दव्तीय की ’सुषमा’ (परम-शोभा) पद से निवेदित की जा सकती है।
  • प्रथम धारा के कवि थे-उड़ान… (615 more words) …

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