CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 16 of 23)

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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि का आचार्यत्व - तोष कवि

तोष

  • जीवन परिचय-संस्कृत के आचार्यों का आश्रय लेते हुए भी अपने ढंग से रस-निरूपण करने वाले इस युग के आचार्यो में तोष का नाम सबसे पहले लिया जा सकता हैं यह इलाहाबाद के निकट स्थित श्रृगवेरपुर (सिगरौर) नामक स्थान के निवासी थे तथा इनके पिता का नाम चतुर्भुज था। यह सरयूपारिण शुक्ल ब्राह्यण थे।
  • रचनाएँ-इनके दव्ारा रचित सुधानिधि, नखशिख, और विनयशतक ये तीन ग्रंथ कहे जाते हैं। इनमें आज केवल सुधानिधि (1634) ही उपलब्ध है। कुछ लोग रचना-काल संबंधी इनके दोहे के पाठभेद के आधार पर इसे 1734 ई. में रचित मान

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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि रसलीन

रसलीन

  • जीवन परिचय-व्यवस्थित विवेचन और कवित्व का समान रूप से निर्वाह करते हुए रीतिनिरूपण करने वाले इस युग के इने-गिने आचार्यों में सैयद गुलाम नबी रसलीन (1699 - 1750) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उत्तरप्रदेश के जिला हरदोई के प्रसिद्ध साहित्य-केन्द्र बिलग्राम के रहने वाले थे। इनके मामा मीर अब्दुल जीमल और गुरु मीर तुफैल अहमद अच्छे कवि थे, जिनसे इन्हे काव्य रचना की प्रेरणा मिलीं इनके पिता का नाम सैयद मुहमद बाकर था। यह अच्छे संगीतज्ञ होने के साथ-साथ सुयोग्य सैनिक, तीरन्दाज और घुड़सवार भ

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