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रीतिकाल के प्रथम कोटि (रीतिबद्ध) के आचार्य जसवंतसिह

बेनी बंदीजन: -असनी के बंदीजन बेनी सं. 1700 के लगभग वर्तमान में थे। इनका कोई प्रसिद्ध ग्रंथ नहीं है। हाँ कुछ फुटकर रचनाएँ अवश्य हैं। बुंंदेलखंड कविवर मंडन की 5 पुस्तकों का पता खोज से लग पाया है- रस रत्नावली, रस विलास, जनक पचीसी, जानकी जूको ब्याह और नैन पचास।

मतिराम

जीवन परिचय-रीतिबद्ध कवियों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। ये आदि आचार्य चिंतामणि के भाई थे। जन्मकाल सं. 1764 के आसपास है। बूँदीराज महाराज भावसिंह के आश्रम में रहकर फिर महाराज शंभुनाथ सोलकी के आश्रय में रहे थे। इन्होंने ’ललित ललाम’ नामक अलंकार ग्रंथ की रचना की। इनका… (1104 more words) …

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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) रसिकगोविन्द

रसिकगोविन्द-

  • जीवन परिचय-रीतिकाल के अंतर्गत जिन भक्तों, ने आचार्यो-कर्म दव्ारा रीति-साहित्य को समृद्ध किया, उनमें रसिकगोविन्द का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इनका जन्म 1743 ई. के आसपास राजस्थान के जयपुर नगर में नाटणीगोत्रीय खंडेलवाल वैश्य -परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि दैवी प्रकोप अथवा राजग्रकोप के कारण संपत्ति के नष्ट हो जाने पर यह वृन्दावन चले गये थे और निम्बार्क-संप्रदाय की रिव्यासीय गद्दी की पंरपरा के सर्वेश्वरशरण देवी चार्य के शिष्य बनकर रहने लगे थे। यहीं पर इनकी मृत्यु 1838 ई. में हुई।
  • रचनाएँ-इनके दव्ारा रचे हुए 10 ग्रंथ कहे जाते हैं- रामायणसूचनिका,… (456 more words) …

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