CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 13 of 23)

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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) सोमनाथ

सोमनाथ

  • जीवन परिचय- संवाग-निरूपक रीतिकवियों में सोमनाथ अथवा शशिनाथ का स्थान भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। इनके अपने कथन के अनुसार यह ज्ञातव्य है कि यह माथुर ब्राह्यण नीलकण्ठ के पुत्र थे तथा भरतपुर के महाराज बदनसिंह के कनिष्ठ पुत्र महाराज प्रतापसिंह के आश्रय में रहते थे। इनका कविता काल 1725 से 1760 ई. के बीच ठहरता है।
  • रचनाएँ- इनके दव्ारा रचित यह 5 ग्रंथ बताये जाते हैं-रसपीयूषनिधि, श्रृंगारविलास, कृष्णलीलावती, पंचाध्यायी, सुजानविलास और माधवविनोद। इनमें कृष्णलीलावती और सुजानविलास को छोड़ सभी

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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) भिखारीदास

भिखारीदास

  • जीवन परिचय- जीवन परिचय-इनके अंतर रीति-ग्रंथ प्रणेताओं की भीड़-सी लगी दिखाई पड़ती है, ’जग-नामा’ के रचियता रीधर या मुरलीधर (सं. 1737 ज. का. ), बिहारी सतसई कवि प्रिया आदि के टीकाकार तथा अलंकार माला, रस रत्नमाला आदि के प्रणेता सूरति मिश्र, रस चंद्रोदय, विनोद चंद्रिका के निर्माता उदयनाथ, सतसई के टीककार बिहारी के पुत्र कृष्ण कवि, अलंकार चंद्रोदय के जन्मादाता रसिकसुमति आदि-आदि आलंकारिकों के अंतर ख्यातनामा और उल्लेखनीय आचार्य भिखारीदास हो गए हैं। ये अवध जिला के श्रीवास्तव कायस्थ थे।

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