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नीतिकार एवं सूक्तिकार के कवि सूदन, गोविन्द सिंह

नीतिकार एवं सूक्तिकार

  • नीतिकार तथ्य-निरूपण दव्ारा बोधवृत्ति को उतेजित करते हैं। ऐसे नीतिकारों में वृन्द, वैताल, गिरिधरराय तथा घाघ अधिक प्रसिद्ध हैं। नीति काव्यकारों की परंपरा संस्कृत से बराबर चली आ रही है। भर्तुहरि, हेमचंद्र, तुलसी, नरहरि रहीम आदि ने इस परंपरा का पूर्णत: निर्वाह किया है।

सूदन-

  • जीवन परिचय-येमथूरा के निवासी थे। सूदन भरतपुर के महाराज बदन सिंह के पुत्र सुजानसिंह उपनाम सूरजमल के दरबार में रहते थे। अपने आश्रयदाता के विक्रम का वर्णन करते हुए सूदन कवि ने ”सुजान चरित्र” नामक प्रबंध काव्य लिखा है। भरतपुर के जाट राजा सूरजमल ने कितनी ही बार दिल्ली पर… (345 more words) …

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दव्तीय कोटि के कवि (रीतिसिद्ध) ग्वाल

ग्वाल

  • जीवन परिचय-कवित्व एवं आचार्यत्व का सम्यक्‌ निर्वाह करने वाले युग के अंतिम चरण के सर्वांग-निरूपक कवियों में ग्वाल का स्थान अन्यतम कहा जा सकता है। इनका जन्म 1791 ई. में सेवाराम नामक ब्रह्यभटट (बंदीजन) के यहाँ वृन्दावन में हुआ था तथा बाद में मथुरा में आकर बस गये थे। इन्होंने आरंभिक शिक्षा राधावल्लभीय गोस्वामी दयालाल से ग्रहण की और काव्यशास्त्र का अध्ययन काशी में अपनी ननिहाल में रह कर किया। बरेली-निवासी कवि खुशहालराय इनके काव्य गुरु थे, ऐसा भी उल्लेख मिलता है। इनका स्वर्गवास 1868 ई. रामपुर में हुआ। अपने जीवन-काल में ये लाहौर, नाभा पटियाला, टोंक, अमृतसर… (495 more words) …

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