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रीतिकाल की विशेषताएँ

इस काल की सामान्य विशेषताओं पर ध्यान देना चाहिए था और यह देखने का प्रयत्न करना चाहिए कि कहाँ तक परिस्थितियाँ उनके उद्भव के प्रति उत्तरदायी है। राजनीतिक दृष्टि से यह काल औरंगजेब के शासनकाल से आरंभ होकर मुगल राज्य के पतन तक चला जाता है। औरंगजेब की कट्टर धार्मिक एवं राजनीतिक नीति ने आंतरिक क्षेत्र में पर्याप्त अंशाति फैल दी थी, पर कला एवं साहित्य की दृष्टि से वह काल उत्कर्ष पर था। यहाँ आपातत: विरोध लक्षित होता है, विचारत: नहीं। उन दिनों मुगल सल्तनत की छाया में छोटे-बड़े राजे, रईस एवं जमींदार सभी निष्क्रिय एवं विलासी हो गए… (1919 more words) …

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रीतिकाल के दव्तीय कोटि के (रीतिसिद्ध) कवि चिंतामणि त्रिपाठी

चिंतामणि त्रिपाठी

  • जीवन परिचय: -कानपुर जिला के अंतर्गत तिकवांपुर स्थान के निवासी त्रिपाठी के चार पुत्र हुए और चारों कवि थे- चिंतामणि, मतिराम, भूषण एवं जयशंकर या जटाशंकर। चिंतामणि इनमें सबसे बड़े थे। इनमें से प्रथम तीन तो हिंदी साहित्य में काफी प्रसिद्ध है। चिंतामणि ने सं. 1707 में कविकुल कल्पतरु की रचना की। शिवसिंह सरोजकार ने इन्हें नागपुर के भेंसला मकरंद शाह के दरबारी कवि के रूप में माना है। रीतिकाल के आरंभ सं. 1666 तथा कविता काल संवत 1700 के आस-पास है। उनके प्रमुख ग्रंथों के आधार पर कह सकते हैं कि चिंतामणि ने काव्य के विधि… (968 more words) …

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