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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि पद्माकर

पद्माकर

  • जीवन परिचय-कवित्व का पूर्णत: निर्वाह करते हुए नवरसों का सफल निरूपण करने वाले गिने-चुने आचार्यों में पद्माकर का नाम लिया जा सकता है। यह तैलंग ब्राह्यण थे और इनका जन्म 1753 ई. में मध्यप्रदेश के सागर नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता मोहनलाल भटट भी अच्छे कवि थे। और सामान्यत: अनुष्ठान और मंत्र-साधना का कार्य करते थे। यह सागर-नरेश रघुनाथराव अप्पा, महाराज जैतपुर, सुमरा-निवासी नोने अर्जुनसिंह, दतिया-नरेश महाराज पारीक्षित, शुलाउद्दौला के जागीदार गोसाई अनूपगिरि (उपनाम हिम्मतबहादुर), सितारा-नरेश रघुनाथराव, जयपुर-नरेश प्रतापसिंह और उनके पुत्र जगतसिंह, उदयपुर-नरेश महाराज भीमसिंह तथा ग्वालियर-नरेश दौलतराव सिन्धिया के आश्रय में रहे। 1833 ई.… (272 more words) …

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तृतीय कोटि के (रीतिमुक्त) कवि घनानंद

इस काल के घनानंद, आलम, रसनिधि, बोधा, पजनेस आदि अन्य प्रसिद्ध भाुवक और रसज्ञ कवि हैं जिनहोंने प्रेम-मार्ग के निरूपण में काव्य की रचना की।

घनानंद

जीवन परिचय-रीतिमुक्त कवियों की स्वच्छ काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। इस धारा के प्रमुख एवं शिरोमणि कवि घनानंद हैं। ये जाति के कायस्थ थे तथा बादशाह मुहम्मदशाह आक्रमण (सं. 1828) में हुई थी। यह भी कहा जाता है कि ये श्रेष्ठ कवि और उच्चकाटि के बड़े अच्छे गायक थे।

घनानंद गाथा-कुछ लोगों ने बादशाह को बताया कि ये बहुत अच्छे गवैये हैं, इस पर बादशाह ने इनसे गाने का अनुरोध किया। घनानंद… (2221 more words) …

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