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दव्तीय कोटि (रीतिसिद्ध) कवि उजियारें

उजियारे

  • जीवन परिचय-यह वृन्दावन-निवासी सनाढ्‌य ब्राह्यण नवलशाह के पुत्र थे। इन्होंने 1780 ई. के आसपास ’जुगलरस प्रकाश’ और ’रसचन्द्रिका’ की रचना की थी। ’रसचन्द्रिका के 16 और ’जुगलरस प्रकाश’ के 12 प्रकाशों में रस-सामग्री और विभिन्न रसों का प्राय: एक-जैसा विवेचन किया गया है- अन्तर केवल इतना ही है कि ’रसचन्द्रिका’ के अंत में ’रसरोध’ शीर्षक से रस-विरोधी बातों की चर्चा ’जुगलरस प्रकाश’ की अपेक्षा अधिक हैं। विवेचन का
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रीतिकाल के प्रथम कोटि (रीतिबद्ध) के आचार्य मिश्र व त्रिवेदी

  • सुखेदव मिश्र

    जीवन परिचय-सुखदेव दौलतपुर के निवासी थे। इनका कविताकाल संवत्‌ 1720 से 1760 तक है। ये असोथर के राजा भगवंतराय, डौड़ियाखेरे के राव मर्दन सिंह, औरंगजेब के मंत्री फाजिल अलीशाह और अंत में मुरार मऊ के राजा देवीसिंह के यहाँ रहे है। ये बहुत ही प्रौढ़ कवि तथा आचार्य थे।

    रचनाएँ-अब तक इनकी सात रचनाओं का पता चलता है- वृत्तिविचार, छंदविचार, फाजिलअली प्रकाश, रसार्णव, श्रृंगारलता, अध्यात्मप्रकाश और

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