CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-रीतिकाल (Ritikal) Revision (Page 10 of 23)

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तृतीय कोटि के (रीतिमुक्त) के वर्ग

रीति मुक्त धारा के अतरिक्त इन कवियों में भी रचना की दृष्टि से कई उपवर्ग किए जा सकते हैं। 1 प्रबंधकार 2 नीतिकार 3 भक्तिकाव्यकार 4 सूक्तिकार 5 ज्ञानोपदेशक 6 वीरकाव्यकार।

प्रबंधकार-इस काल में अनेक प्रबंध लिखे गये, पर उनमें से कम में कवित्व का आकर्षण रहा। ये प्रबंध भी दो प्रकार के हैं- कथात्मक प्रबंध और वर्णनात्मक प्रबंध।

कथात्मक प्रबंधकार- ऐसे प्रबंधकारों में दोहे चौपाइयों में लिखे गये काव्य निम्न हैं-

  • (सं. 1718 में पूरा होने वाला) महाभारत के निर्माता सबलसिंह चौहान की ’विजय मुक्तावली’

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नीतिकार एवं सूक्तिकार के कवि सूदन, गोविन्द सिंह

नीतिकार एवं सूक्तिकार

  • नीतिकार तथ्य-निरूपण दव्ारा बोधवृत्ति को उतेजित करते हैं। ऐसे नीतिकारों में वृन्द, वैताल, गिरिधरराय तथा घाघ अधिक प्रसिद्ध हैं। नीति काव्यकारों की परंपरा संस्कृत से बराबर चली आ रही है। भर्तुहरि, हेमचंद्र, तुलसी, नरहरि रहीम आदि ने इस परंपरा का पूर्णत: निर्वाह किया है।

सूदन-

  • जीवन परिचय-येमथूरा के निवासी थे। सूदन भरतपुर के महाराज बदन सिंह के पुत्र सुजानसिंह उपनाम सूरजमल के दरबार में रहते थे। अपने आश्रयदाता के विक्रम का वर्णन करते हुए सूदन कवि ने “सुजान चरित्र” नामक प

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