Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

रीतिकाल के प्रथम कोटि (रीतिबद्ध) के आचार्य प्रतापसिंह

प्रतापसिंह-इस धारा के अंतिम कवियों में प्रतापसिंह की उल्लेखनीय स्थिति है। इनका कविता काल (संवत्‌ 1880 से 1900) है। इनकी कई रचनाएँ हैं-

  • जयसिंह प्रकाश संवत्‌ 1851
  • श्रृंगार मंजरी (संवत्‌ 1889)
  • श्रृंगार शिरोमणि (संवत्‌ 1894)
  • अलंकार चिंतामणि (संवत्‌ 1894)
  • काव्य विनोद (संवत्‌ 1896)
  • रसराज की टीका (संवत्‌ 1896)
  • रत्नचंद्रिका (टीका-संवत्‌ 1896)
  • जुगल नख-शिख
  • बलभद्र नख-शिख की टीका।

यहाँ तक रीतिबद्ध धारा का इतिहास प्राय: समाप्त होता है। इसके बाद

… (12 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

रीतिकाल के अन्य कवि में वृंद, गिरि

रीतिकाल के अन्य कवि

  • रीति युग के अंतर्गत कवियों का एक ऐसा वर्ग भी हुआ जिसने फुटकर रूप से काव्य रचना की। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इन्हें ’कवि’ न कहकर सूक्तिकार कहा है। इस वर्ग में वृंद, बाबा दिनदयाल गिरि आदि का नाम प्रमुख है। उनका संक्षिप्त परिचय आगे दिया जाता है।

वृंद-’

  • जीवन परिचय-मेड़ता (जोधपुर) निवासी वृंद कृष्णगढ़ के राजा महाराज राजसिंह के गुरू थे। वृंदावनदास जो मृख्यत:
… (431 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In