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19वीं सदी की पत्रिकाओं के नाम व भाषा

19वीं सदी के उत्तरार्ध की हिन्दी पत्रकारिता

19 वीं सदी के उत्तरार्द्ध की हिन्दी पत्रकारिता का अध्ययन तीन चरणों में किया जा सकता हैं।

  1. प्रथम उत्थान (1826 से 1867) -तत्वबोधिनी पत्रिका लेखक राजाराम मोहन राय।
  2. दूसरा उत्थान (1868 से 1885) - कविवचन सुधा 1867, संपादक- भारतेन्दु हरिशचंद्र, सदादर्श 1874, संपादक-लाला श्रीनिवासदास
  3. तीसरा उत्थान (1886 से 1900) - बंगवासी- संपादक-बालकुकुन्द गुप्त

नोट-बाकी सब पत्रिकाओं का विस्तार पूर्वक वर्णन पूर्व में बता चुके हैं।

भाषा-भारतेन्दु के काव्य में नई भावनाओं की अभिव्यक्ति हुई है। उन्होंने ब्रजभाषा में काव्य की रचना की किन्तु यह भाषा जनभाषा में प्रचलित ब्रजभाषा थी। उन्होंने समाज… (144 more words) …

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भारतेन्दु युग की विशेषताएँ

  • उनके बहु आयामी व्यक्तित्व की कतिपय विशेषताओं को निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता हैं-

    भारतेन्दु जी की विशेषताएँ-

  • युगीन भावनाओं का वाहक-हिन्दी भाषा और साहित्य की सर्वांगीण विकास की दृष्टि से उनकी तुलना में कोई दूसरा पूर्ववती या परवर्ती साहित्यकार नहीं आया है। जन-जागरण के अग्रदूत भारतेन्दु ने अपने साहित्य के माध्यम से जन चेतना को विकसित किया है। उन अकेले के साहित्य ने ही जन-जीवन में जो चेतना ला दी वह उस समय के पूर्व सामूहिक प्रयत्नों से भी संभव न थी। भारतेन्दु जी के काव्य में उत्कृष्ट देशभक्ति और वास्तविक राष्ट्रीयता झलक उठती हैं। उन्होंने भारत… (491 more words) …

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