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भारतेन्दु युग का योगदान

  • प्रथम उत्थान काल और भारतेन्दु युग का योगदान
  • भारतेन्दु-हिन्दी-गद्य के निर्माण में सन्‌ 1876 से प्रकाशित होने वाली भारतेन्दु की ’हरिचन्द्र मैगजीन एक नूतन दिशा का सुत्रपात किया। अत: इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतेन्दु अपनी इस पत्रिका दव्ारा साहित्य के प्रत्येक प्रचलन करना चाहते थे और इसमें कोई संदेह नहीं कि इस प्रयोगकाल जो कि हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में भारतेन्दु युग के नाम से प्रसिद्ध हैं, लोगों ने पहली बार नाटक, उपन्यास, आलोचना आदि गद्य के साहित्य रूपों का नाम सुना। भारतेन्दु ही पहले लेखक हैं, जिन्होंने जनता का ध्यान इस साहित्य रूपों की ओर… (160 more words) …

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आधुनिक काल का प्राचीन युग

भारतेन्दु पूर्व हिन्दी गद्य (प्राचीन युग से लेकर सन्‌ 1872 ई. तक)

  • हिन्दी का उद्भव-निर्भ्रान्त और निश्चायात्मक रूप से तो यह कह पाना कठिन है कि हिन्दी की प्रादेशिक बोलियों के अस्तित्व में आने की तिथियां क्या, है क्योंकि यह एक ऐसी अनजान में चलने वाली लंबी प्रक्रिया हैं, जिसको ठीक-ठाक पकड़ पाना असंभव है। फिर भी मोटे तौर पर यह माना जाता है कि प्राकृत की अंतिम अवस्था ’अपभ्रंश’ और ’आधुनिक’ भारतीय देशी भाषाओं, के उदय की मध्यवर्ती सीमा 1200 - 1400 है- भाषा की दृष्टि से इसे ’संक्रांति काल’ की संज्ञा दी गई है। यह वह कालावधि… (502 more words) …

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