CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-आधुनिक काल (Modern Period) Revision (Page 2 of 9)

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भारतेन्दु जी की उपलब्धियाँ

  • हिन्दी साहित्य को भारतेन्दु की उपलब्धियाँ

    नि: संदेह भारतेन्दु युग प्रवर्तक और युगांतकारी मजे कलाकार हैं तथा आधुनिक हिन्दी साहित्य में एक नयी एवं स्वस्थ्य चेतना केन्द्र बिन्दु के जन्मदाता हैं। हिन्दी खाड़ी बोली को परिष्कृम करने का श्रेय उन्हें ही हैं। कविता उनके ही दव्ारा नई चाल में ढली। सामान्य जन-जीवन और उसकी समस्याओं से उसका सीधा सम्पर्क हुआ । शिल्प के क्षेत्र में उन्होंने नए-नए प्रयोग किए। नाटकों के विकास में रंगमंच का निर्माण हुआ। निबंधों दव्ारा युगीन समस्याओं का चित्रण हुआ। इसलि

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19वीं सदी की पत्रिकाओं के नाम व भाषा

19वीं सदी के उत्तरार्ध की हिन्दी पत्रकारिता

19 वीं सदी के उत्तरार्द्ध की हिन्दी पत्रकारिता का अध्ययन तीन चरणों में किया जा सकता हैं।

  1. प्रथम उत्थान (1826 से 1867) -तत्वबोधिनी पत्रिका लेखक राजाराम मोहन राय।
  2. दूसरा उत्थान (1868 से 1885) - कविवचन सुधा 1867, संपादक- भारतेन्दु हरिशचंद्र, सदादर्श 1874, संपादक-लाला श्रीनिवासदास
  3. तीसरा उत्थान (1886 से 1900) - बंगवासी- संपादक-बालकुकुन्द गुप्त

नोट-बाकी सब पत्रिकाओं का विस्तार पूर्वक वर्णन पूर्व में बता चुके हैं।

भाषा-भारतेन्दु के काव्य में नई भाव

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