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आधुनिक काल में भारतेन्दु युग

भारतेन्दु एवं हिन्दी गद्य

भारतेन्दु ने अपने काव्य में छूआछूत, बालविवाह, वृद्धविवाह, अंधविश्वास आदि पर व्यंग्य करते हुए उनके प्रति विरोध प्रकट किया हैं। भारतेन्दु जी राधा-कृष्ण के भक्त थे और उनकी भक्ति को कवि ने अपने काव्य का विषय बनाया। उनकी कविता में स्थान-स्थान पर हास्य विनोद का पुट भी दिखाई देता है।

विधाएँ व विषय-विवेच्य युग का गद्य साहित्य पूर्व युगों की अपेक्षा अधिक बहुमुखी, व्यापक, गुणयुक्त और सब मिलाकर समृद्ध है। इसका प्रमाण है- ब्रज, खड़ी बोली, दक्खिनी हिन्दी, राजस्थानी भोजपुरी और अवधी आदि भाषा-विभाषाओं में उपलब्ध गद्य-रचनाएं इस युग की प्रमुख गद्य-विधाएं हैं- वार्ता, बात,… (233 more words) …

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आधुनिक काल के प्राचीन युग में खड़ी बोली

  • खड़ी बोली-उपर्युक्त बोलियों में निबद्ध गद्य-निर्माण को खड़ी बोलीतर और खड़ी बोली बद्ध-दो धाराओं में बांटकर देखा जाए-तो यह स्पष्ट लक्षित होता है कि मध्यकाल के अंतर्गत (1650 - 1800) खड़ी बोली बोलियों में लिखा गया गद्य पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है। ब्रजी और राजस्थानी में तो प्रचुर मात्रा में की गई गद्य रचना उपलब्ध होती ही है, अवधी, मैथिली आदि पूर्वी हिन्दी के साथ हिन्दुस्तानी तथा दक्खिनी में हिन्दी में भी उपलब्ध होती ही है। फोर्ट विलियम विश्वविद्यालय की स्थापना से पूर्व अर्थात्‌ 1800 से पूर्व की खड़ी बोलीतर बोलियों का गद्य आदिकालीन गद्य से रूप, शैली… (768 more words) …

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