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हिन्दी गद्य का उद्भव और विकास

  • आधुनिक काल: हिन्दी गद्य का उद्भव और विकास

    हिन्दी साहित्य की विकास यात्रा का अध्ययन अंतिम सोपान है- आधुनिक काल। इस काल में गद्य की प्रधानता होने के कारण इसको ’गद्यकाल’ भी कहा गया है। यहाँ पर ’आधुनिक’ शब्द एकदम समय-सापेक्ष हैं, मात्र व्युत्पतिक अर्थ (वर्तमान, समकाल अथवा सम्प्रति) में प्रयुक्त नहीं है। अपने अर्थ-प्रसार (नया, अंतिम, नवीन) में भी यह सीमित नहीं है। यह बात भी दृष्टव्य है कि ’आधुनिक’ शब्द प्राचीन काल जैसा कोई काल-नामकरण हिन्दी साहित्य में नहीं मिलता है। नि: संदेह यह नाम किसी प्रधान प्रवृत्ति को भी स्पष्ट नहीं करता है। इतना ही नहीं, समय-समय… (453 more words) …

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आधुनिक काल में हिन्दी गद्य का विकास

भारतेन्दु और उसके बाद हिन्दी गद्य का विकास

भारत में ब्रिटिश शासन के आविर्भाव के साथ साहित्य में गद्य का युग आविर्भूत हुआ पर इसका अर्थ निकालना उचित नहीं होगा की पद्य महत्वपूर्ण हो गया। नए युग में भावों को अभिव्यक्त करने का माध्यम के रूप में काव्य का महत्व बना रहा किन्तु साथ ही जीवन की सामान्य आवश्यकताओं को प्रस्तुत करने का दायित्व निभाने के लिए गद्य ने बागडोर अपने हाथों में संभल ली। ब्रजभाषा पदावली जीवन संघर्ष को प्रकट करने में समर्थ न थी। दूसरी ओर उर्दू और अंग्रेजी जनता की भाषाएं नहीं थी। जन भाषा के रूप… (1132 more words) …

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