CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-आधुनिक काल (Modern Period) Revision (Page 1 of 9)

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भारतेन्दु युग का योगदान

  • प्रथम उत्थान काल और भारतेन्दु युग का योगदान
  • भारतेन्दु-हिन्दी-गद्य के निर्माण में सन्‌ 1876 से प्रकाशित होने वाली भारतेन्दु की ’हरिचन्द्र मैगजीन एक नूतन दिशा का सुत्रपात किया। अत: इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतेन्दु अपनी इस पत्रिका दव्ारा साहित्य के प्रत्येक प्रचलन करना चाहते थे और इसमें कोई संदेह नहीं कि इस प्रयोगकाल जो कि हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में भारतेन्दु युग के नाम से प्रसिद्ध हैं, लोगों ने पहली बार नाटक, उपन्यास, आलोचना आदि गद्य के साहित्य रूपों का नाम सुना। भारतेन्दु ही

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भारतेन्दु युग की विशेषताएँ

  • उनके बहु आयामी व्यक्तित्व की कतिपय विशेषताओं को निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता हैं-

    भारतेन्दु जी की विशेषताएँ-

  • युगीन भावनाओं का वाहक-हिन्दी भाषा और साहित्य की सर्वांगीण विकास की दृष्टि से उनकी तुलना में कोई दूसरा पूर्ववती या परवर्ती साहित्यकार नहीं आया है। जन-जागरण के अग्रदूत भारतेन्दु ने अपने साहित्य के माध्यम से जन चेतना को विकसित किया है। उन अकेले के साहित्य ने ही जन-जीवन में जो चेतना ला दी वह उस समय के पूर्व सामूहिक प्रयत्नों से भी संभव न थी। भारतेन्दु जी के काव्य में उत्कृष

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