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प्रमुख निर्गुण संत कवि – सुन्दरदास

  • संत दादूलाल के शिष्य सुन्दरदास (1596 - 1679) बड़े ही प्रतिभा-सपन्न कवि और साधक थे। जयपुर राज्य की प्राचीन राजधानी धौंसा के परमानंद खंडेलवाल के यहाँ उनका जन्म हुआ था। 6 वर्ष की अल्पायु में वे संत दादू के शिष्य हुए और 11 वर्ष की अवस्था में संत जगजीवन तथा संत रज्जब के साथ काशी की यात्रा की। वहाँ उन्होंने दीर्घकाल तक निवास किया और संस्कृत-व्याकरण, साहित्य तथा दर्शन का गंभीर अध्ययन कर, समस्त विधाओं में पारंगत होकर, 1625 ई. में शेखावटी लौट आये। तदनन्तर फतेहपुर में किसी गुफा में निवास कर 12 वर्ष तक उन्होंने योग-साधना की। देशाटन उन्हें… (190 more words) …

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भक्तिकाल में सगुण काव्य - सेनापति

  • इनका जन्मकाल 1589 ई. में लगभग माना जाता है। यह गंगाधर के पुत्र, परशुराम के पौत्र और हीरामणिदीक्षित के शिष्य थे। ’कवित्त-रत्नाकर’ इनका प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसकी रचना इन्होंने संवत्‌ 1706 में की थी।

संवत्‌ सत्रह सै छ में सेइ सियापति पाय।

सेनापति कविता तजी सज्जन सजो सहाय।

  • इस ग्रंथ की चौथी और पांचवी तरंगो में रामायण के अनेक मधुर प्रसंगों का वर्णन सुसंस्कृत अर्थगर्भित भाषा में किया गया है। अनुप्रास और यमक अलंकारो का सेनापति की भाषा में अत्यधिक प्राचुर्य है। हिन्दी में भावनानुकुल ऋतु-वर्णन के लिए भी यह प्रसिद्ध है।
  • भक्तिकाल के रामभक्त कवियों में प्राणचन्द्र चौहान, माधवदास,… (439 more words) …

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