CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 7 of 16)

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – मलूकदास

मलूकदास (1574 - 1682) का आविर्भाव उस समय हुआ जब भारतवर्ष में अकबर के साम्राज्य का दीपक हिन्दुओं के स्निग्ध स्नेह से जगमगा रहा था। उनका महा प्रस्थान औरंगजेब के बाल्य-काल में हुआ। उनके पिता का नाम सुन्दरदास खत्री था। संसार से अलग का जो बीज मलूकदास के हृदय में आगे चलकर पल्लवित और पुष्पित हुआ, उसका बीजारोपण उनकी बाल्यावस्था में ही हो चुका था। उनके दीक्षा-गुरु के संबंध में हिन्दी के इतिहासकारों में बड़े मतभेद हैं कुछ उन्हें कील का शिष्य मानते हैं और कुछ द्राविड़ विट्‌ठल को उनका गुरु बताते ह

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प्रमुख निर्गुण संत कवि - बाबा लाला

बाबा नामक चार साधकों का आविर्भाव पंजाब प्रान्त में हुआ।

  1. इनमें से एक पिंड दादान खां के निवासी थे।
  2. दूसरे पश्चिमी प्रान्त के मेरा या थेरा नगर में रहते थे।
  3. तीसरे संत बाबा लाल का मठ गुरुदासपुर में स्थित है।
  4. चौथे संत कवि बाबा लाल शाहजादा दारा शिकोह के संपर्क में आये थे और उन दोनों में धार्मिक संलाप हुआ था।
  • आचार्य क्षितिमोहन सेन के अनुसार प्रस्तुत बाबा लाला का आविर्भाव 1590 ई. में मालवा प्रदेश के एक खत्री-परिवार में हुआ था। किन्तु बाबालाली संप्रदाय आस्थावान्‌ भक्तों के अनुसार उनका जन्म 13

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