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प्रमुख निर्गुण संत कवि – कबीरदास

भारतीय धर्म-साधना के इतिहास में कबीरदास ऐसे महान्‌ विचारक एवं प्रतिभाशाली महाकवि हैं, जिन्होंने शताब्दियों की सीमा का उल्लंघन कर दीर्घकाल तक भारतीय जनता का पथ आलोकित किया और सच्चे अर्थों में जन-जीवन का नायकत्व किया। उनके आविर्भावकाल का निर्णय करने के लिए उपलब्ध सामग्री को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है- अंतस्साक्ष्य, साम्प्रदायिक सामग्री, प्राचीन ग्रंथें एवं विदव्ानों के अभिमत। अंतस्साक्ष्य की दृष्टि से उन्होंने केवल दो प्रसंगों-काजी दव्ारा हाथी चलवाने तथा लोहे की जंजीरों से बंधवाकर गंगा में डुबोने के प्रयत्न का वर्णन किया है। सिकन्दर लोदी (1488 - 1517) दव्ारा किये गये अत्याचारों का जो… (1542 more words) …

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प्रमुख निर्गुण संत कवि - रामानंद

  • रामानंद अपने गुरू के सर्वाधिक साधक एवं प्रगतिशील विचारक थे। संत -मत के प्रचार एवं प्रसार का श्रेय इन्हीं को है। नाभादास ने ’भक्तमाल’ में लिखा है कि अनेक शिष्य-प्रशिष्य थे, जिनमें अनंतदास, कबीर, पीपा, धन्ना आदि विशेषरूपेण उल्लेखनीय हैं। रामानंद को दीर्घ, पवित्र एवं साधनात्मक जीवन प्राप्त हुआ था, किन्तु इनके आविर्भाव-काल, निधन-काल तथा जीवन-चरित्र के संबंध में कोई प्रामाणिक सामग्री उपलब्ध नहीं होती है।
  • ’भक्तमाल’ के अनुसार रामानुजाचार्य की शिष्य -परम्परा में चतुर्थ शिष्य थे। इनका आविर्भावकाल 14वीं शताब्दी का अंतिम चरण माना जा सकता है, क्योंकि यह प्रसिद्ध है कि यह कबीर और पीपा के गुरु थे… (383 more words) …

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