CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 6 of 16)

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – लालदास

  • लाल-प्रंथ के प्रवर्तक संत लालदास (1540 - 1648) का आविर्भाव अलवर राज्य के ग्राम धौलीधूप में एक ऐस मुसलमान-परिवार में हुआ था जहाँ भरण-पोषण तथा जीविका के साधनों के लिए इतना संघर्ष करना पड़ता था कि बालको की शिक्षा-दीक्षा का कोई प्रबंध न हो पाता था। भगवद्भक्ति का अंकुर लालदास के हृदय में बाल्यावस्था में ही अंकुरित हो गया था। वे साधुओं का सत्संग करते रहते और नाम-जप में संलग्न रहेत थें वय एवं समय के साथ उनकी ख्याति दूर-दूर तक फेलने लगी थी। कुछ समय बाद वे अपने स्थान को त्यागकर रामगढ़ परगने में

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प्रमुख निर्गुण संत कवि - दादूदयाल

  • दादू पंथ के प्रवर्तक संत दादूदयाल धर्म-सुधारक, समाज-सुधारक और रहस्यवादी कवि थे। मध्यकालीन साधकों में उनका व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली है। उनका जन्म अहमदाबाद में हुआ था, किन्तु उनके आविर्भाव-काल के संबंध में मतभेद हैं डॉ. बड़थ्वाल, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और परशुराम चतुर्वेदी के अनुसार उनका जन्म 1544 ई. में हुआ था, जबकि डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार वे 1601 ई. में अर्विभूत हुए थें दादू की जाति के संबंध में भी भेद हैं सुधाकर दव्वेदी के मत से वे धुनिया थे। क्षितिमोहन सेन ने अपने ग्रंथ ’दादू’

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