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प्रमुख निर्गुण संत कवि – रैदास

  • मध्ययुगीन साधकों में रैदास अथवा रविदास का विशिष्ट स्थान है। निम्नवर्ग में समुत्पन्न हो कर भी उत्तम जीवन-शैली, उत्कृष्ट साधना-पद्धति तथा उल्लेखनीय आचरण के कारण वे आज भी भारतीय धर्म-साधना के इतिहास में सादर स्मरण किये जाते हैं। रैदास का जन्म काशी में हुआ था व काशी को ही रैदास का निवास-स्थान माना गया है। कबीर की भांति उनके जीवन-काल के विषय में भी बड़ा मतभेद है। ’रैदास की परिचई’ में जन्म काल का उल्लेख नहीं है। ’भक्तमाल’ और डॉ. भंडारकर के अनुसार उनका जन्म 1299 ई. में हुआ था। डॉ. भगवतव्रत मिश्र ने यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया है कि… (271 more words) …

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भक्तिकाल में सगुण काव्य - अग्रदास

  • स्वामी रामानंद की शिष्य-परम्परा में ही रामभक्त कवि अग्रदास हुए। इन्होंने कृष्णदास पयहारी से दीक्षा लेकर शिष्यतत्व स्वीकार किया था। कृष्णदास पयहारी ने जयपुर के समीप गलता नामक स्थान में अपनी गद्दी स्थापित की थी। गलता की गद्दी पर परवर्ती काल में जो शिष्य बैठे, उन्होंने भी भक्ति-साहित्य की विपुल मात्रा में रचना की। अग्रदास 1556 ई. के लगभग विद्यमान थे। इनके अनेक ग्रंथों की चर्चा गलता की गद्दी-परम्परा में आज भी होती है। मुख्य ग्रंथों में ध्यानमंजरी, अष्टयाम, रामभजनमंजरी, उपासना-बावनी और पदावली हैं। ’हितोपदेश भाषा’ भी इनके दव्ारा प्रणीत है। इनकी भाषा ब्रजभाषा है और उसमें प्रवाह के साथ… (125 more words) …

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