CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 5 of 16)

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प्रमुख निर्गुण संत कवि - हरिदास निरंजनी

  • संत हरिदास निरंजनी-संप्रदाय के कवि थे, जिसका मूल स्त्रोत नाथ-पंथ है। साधना-क्षेत्र में इस संप्रदाय को नाथ-पंथ एवं संत मत की मध्यवर्ती कड़ी कहा जा सकता है। यह एक प्राचीन धर्म-संप्रदाय है, जिसका प्रभाव उड़ीसा प्रान्त में किसी-न-किसी रूप में आज तक विद्यमान है। आचार्य क्षितिमोहन सेन ने अपने ग्रंथ ’मेडिवियल मिस्टिसिज्म’ में यह प्रतिपादित किया है कि सर्वप्रथम इस मत का प्रचार उड़ीसा से ही प्रारंभ हुआ था, तदनन्तर यह संप्रदाय अपने जनप्रिय और सच्चे आदर्शो के कारण पूर्व की ओर भी प्रसारित हुआ। इस स

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – सींगा

  • संत सींगा (1519 - 1659) का जन्म मध्यभारत की रियासत बडवानी के खजूर गांव में एक ग्वाल-परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था से ही वे संसार से विरक्त रहा करते थे। एक बार वे हरसूद से भामगढ़-मार्ग पर जा रहे थे, मार्ग में महाराज ब्रह्यगीर के शिष्य मनरंगीर यह भजन गा रहे थे:

समुझि ले औरे मना भाई, अंत न होय कोई अपणा।

यही माया के फंदे में, तर आन भुलाणा।

  • प्रस्तुत पंक्तियों ने संसार की नि: सारता को उनके हृदय में प्रत्यक्ष रूप से अंकित कर दिया और उन्होंने मनरंगीर को अपना आध्यात्मिक पथ-प्रदर्शक स्वीकार

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