CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 4 of 16)

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – नानकदेव

  • नानक-पंथ के प्रवर्तक गुरु नानकदेव (1469 - 1538) इतिहास-प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। उनके दव्ारा संस्थापित सम्प्रदाय ने उन्हीं के जीवन-काल में एक व्यापक संगठन का रूप धारण कर लिया था। राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनका संप्रदाय और भी व्यापक, सुदृढ़ और सुव्यवस्थित होता गया। नानक-पंथ की स्थापना राजनीतिक परिस्थितियों के कारण हुई, किन्तु उसका स्वरूप धार्मिक तत्वों के रंग से अनुरंजित है। नानकदेव समन्वयशील और उदार प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उनमें अद्भूत संगठन-शक्ति, क्षमाशीलता और दूरदिर्शता विद्यमान थ

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – जन्मनाथ

  • संत जन्मनाथ का जन्म 1451 ई. में जोधपुर राज्य के नागौर प्रदेश के पीपासर (अथवा पयासर) ग्राम में राजपूत-परिवार में हुआ। जनश्रुति है कि 34 वर्ष की अवस्था तक इन्होंने एक भी शब्द उच्चरित नहीं किया और चमत्कारित कृत्यों के प्रदर्शन के कारण जनता ने इन्हें जन्भ जी कहना प्रारंभ किया।
  • सिद्धि प्राप्त हो जाने के अनन्तर ये मुनीन्द्र जन्म ऋषि के नाम से विख्यात हुएं इनकी शिक्षा-दीक्षा, विवाह, परिवार-आजीविका आदि के विषय में कोई विशेष विवरण नहीं मिलता। कहा जाता है कि यह आजीवन ब्रह्यचारी रहे। यह भी प्र

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