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सूफी काव्य धारा

  • सूफी काव्य धारा मेें कथ्य और शिल्प दोनों स्तर समृद्ध सर्जनात्मक मिलती है। सुफियों के यहाँ निर्गुण कवियों की अपेक्षा कथ्य की सुसंगठित भाव भूमि प्राप्त होती है, किन्तु दूसरे स्तर पर निर्गुण साहित्य की अपेक्षाकृत उनका साहित्य कम पैना और कम प्रभावी है। यद्यपि आचार्य शुक्ल के अभिमत से सूफी काव्य का साहित्यिक पक्ष अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि में निर्गुण की अपेक्षा कहीं अधिक समृद्ध है। किन्तु इधर के प्रभावशील समीक्षकों के अध्ययन से जो तथ्य प्रकाश में आए है, वे इसी बात के प्रमाण हैं कि सूफियों का सांस्कृतिक मेल-जोल तत्कालिक दृष्टि से भले ही कुछ महत्व का हो… (617 more words) …

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – लालदास

  • लाल-प्रंथ के प्रवर्तक संत लालदास (1540 - 1648) का आविर्भाव अलवर राज्य के ग्राम धौलीधूप में एक ऐस मुसलमान-परिवार में हुआ था जहाँ भरण-पोषण तथा जीविका के साधनों के लिए इतना संघर्ष करना पड़ता था कि बालको की शिक्षा-दीक्षा का कोई प्रबंध न हो पाता था। भगवद्भक्ति का अंकुर लालदास के हृदय में बाल्यावस्था में ही अंकुरित हो गया था। वे साधुओं का सत्संग करते रहते और नाम-जप में संलग्न रहेत थें वय एवं समय के साथ उनकी ख्याति दूर-दूर तक फेलने लगी थी। कुछ समय बाद वे अपने स्थान को त्यागकर रामगढ़ परगने में स्थित बादोनी में निवास करने… (219 more words) …

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