CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 3 of 16)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) covering entire 2018 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

प्रमुख निर्गुण संत कवि – कबीरदास

भारतीय धर्म-साधना के इतिहास में कबीरदास ऐसे महान्‌ विचारक एवं प्रतिभाशाली महाकवि हैं, जिन्होंने शताब्दियों की सीमा का उल्लंघन कर दीर्घकाल तक भारतीय जनता का पथ आलोकित किया और सच्चे अर्थों में जन-जीवन का नायकत्व किया। उनके आविर्भावकाल का निर्णय करने के लिए उपलब्ध सामग्री को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है- अंतस्साक्ष्य, साम्प्रदायिक सामग्री, प्राचीन ग्रंथें एवं विदव्ानों के अभिमत। अंतस्साक्ष्य की दृष्टि से उन्होंने केवल दो प्रसंगों-काजी दव्ारा हाथी चलवाने तथा लोहे की जंजीरों से

… (9793 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

प्रमुख निर्गुण संत कवि – रैदास

  • मध्ययुगीन साधकों में रैदास अथवा रविदास का विशिष्ट स्थान है। निम्नवर्ग में समुत्पन्न हो कर भी उत्तम जीवन-शैली, उत्कृष्ट साधना-पद्धति तथा उल्लेखनीय आचरण के कारण वे आज भी भारतीय धर्म-साधना के इतिहास में सादर स्मरण किये जाते हैं। रैदास का जन्म काशी में हुआ था व काशी को ही रैदास का निवास-स्थान माना गया है। कबीर की भांति उनके जीवन-काल के विषय में भी बड़ा मतभेद है। ’रैदास की परिचई’ में जन्म काल का उल्लेख नहीं है। ’भक्तमाल’ और डॉ. भंडारकर के अनुसार उनका जन्म 1299 ई. में हुआ था। डॉ. भगवतव्रत म

… (2157 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In