CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 2 of 16)

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प्रमुख निर्गुण संत कवि

निर्गुण संतों की विचारधारा के बीज सिद्ध-नाथ कवियों की रचनाओं में तो मिलते ही हैं, आदिकाल में नामदेव ने भी इस दिशा में योगदान दिया था। भक्तिकालीन निर्गुण भक्त कवियों में कबीर, दादू, नानक, रैदास, सुन्दरदास, मलूकदास, प्रभृति संतों ने भक्ति-भावना के प्रसार और भक्ति-काव्य की रचना में न केवल स्वयं उल्लेखनीय योग दिया, अपितु इनकी शिष्य-परम्परा में बाद में भी निर्गुण भक्तिकाव्य की रचना होती रही है।

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प्रमुख निर्गुण संत कवि - रामानंद

  • रामानंद अपने गुरू के सर्वाधिक साधक एवं प्रगतिशील विचारक थे। संत -मत के प्रचार एवं प्रसार का श्रेय इन्हीं को है। नाभादास ने ‘भक्तमाल’ में लिखा है कि अनेक शिष्य-प्रशिष्य थे, जिनमें अनंतदास, कबीर, पीपा, धन्ना आदि विशेषरूपेण उल्लेखनीय हैं। रामानंद को दीर्घ, पवित्र एवं साधनात्मक जीवन प्राप्त हुआ था, किन्तु इनके आविर्भाव-काल, निधन-काल तथा जीवन-चरित्र के संबंध में कोई प्रामाणिक सामग्री उपलब्ध नहीं होती है।
  • ‘भक्तमाल’ के अनुसार रामानुजाचार्य की शिष्य -परम्परा में चतुर्थ शिष्य थे। इनका आविर्भा

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