CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 16 of 16)

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भक्ति आन्दोलन के उदय के सांस्कृतिक परिस्थियाँ व कारण

  • भक्ति साहित्य में भारतीय संस्कति एवं आचार-विचार पूर्ण रूप से सुरक्षित रहे है। भक्तिसाहित्य उच्चतम धर्म की व्याख्या करता है और उसमें उच्चकोटि के काव्य की रचना हुई इस काव्य की आत्मा भक्ति है। भारतीय संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ है उसकी समन्वयातमकता की प्रवृत्ति। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा, कर्मफल में विश्वास, अवतारवाद एवं गौ-ब्राह्यण की पूजा पौराणिक धर्म की विशेषताएँ है जिनका स्वर सगुण भक्ति साहित्य में कर्णगोचर हुआ है। मध्यकालीन धर्म साधना में पूर्ववर्ती सभी धर्म साधनाएँ बनी रहीं। शैव-शक्

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भक्तिकाव्य में लोकधर्म

  • विदव्ानों ने भक्ति काव्य की पहचान एक सशक्त क्रांतिकारी आंदोलन के रूप में की है, समान्यता 14वीं सदी के मध्य में 17 वीं सदी के मध्य तक के कालखंड को भक्तिकाल के नाम से जाना जाता है। यह संक्रांतिकाल था, जिसमें एक तरफ तो हिन्दू धर्म अपने तमात मत-मतान्तरों के बीच सहस्त्रों उदव्ेलनों के बीच विक्षुब्ध था। दूसरी तरफ आक्रांता इस्लाम भारतवर्ष में अपनी जड़ें जमा रहा था, परम्परागत सनातन धर्म के समक्ष एक चुनौती उपस्थित कर दिया था। जैसा कि डॉ. हजारी प्रसाद दव्वेदी कहते हैं कि प्रथम बार अनेक मत-मतान्

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