CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 15 of 16)

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लोक पक्ष

हिन्दी साहित्य के प्रख्यात समीक्षक आचार्य शुक्ल साहित्य शुक्ल साहित्य की रचना भूमिका निरूपति करते हुए उसके लोक पक्ष पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते हैं। लोक की सर्जनात्मक जमीन तक जुड़कर साहित्य उदात्त मूल्यों की प्रतिष्ठा कर सकता है। निर्गुण भक्तिधारा का साहित्यिक मूल्यांकन करते हुए आचार्य शुक्ल लिखते हैं-

प्रस्तत कालखंड के सभी कवि प्राय: अनपढ़ हैं, प्रस्तत कवियों ने भक्तिकाल के दो स्तर निम्न बताएं है-

  • एक स्तर पर तो अत्यंत महत्वपूर्ण बातें कहीं हैं, जिससे दलित वर्ग का आत्मविश्वास जगा है

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सूफी काव्य धारा

  • सूफी काव्य धारा मेें कथ्य और शिल्प दोनों स्तर समृद्ध सर्जनात्मक मिलती है। सुफियों के यहाँ निर्गुण कवियों की अपेक्षा कथ्य की सुसंगठित भाव भूमि प्राप्त होती है, किन्तु दूसरे स्तर पर निर्गुण साहित्य की अपेक्षाकृत उनका साहित्य कम पैना और कम प्रभावी है। यद्यपि आचार्य शुक्ल के अभिमत से सूफी काव्य का साहित्यिक पक्ष अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि में निर्गुण की अपेक्षा कहीं अधिक समृद्ध है। किन्तु इधर के प्रभावशील समीक्षकों के अध्ययन से जो तथ्य प्रकाश में आए है, वे इसी बात के प्रमाण हैं कि सूफियों का

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