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संत सदना

  • निष्ठावान्‌ भक्त और साधक थे तथा 14वीं शताब्दी के मध्य में विद्यमान थे। इनकी पदावली काल-प्रवाह में लुप्त हो चुकी है। ’आदिग्रंथ’ में संकलित इनके एक पद के आधार पर केवल इतना ही कहा जा सकता है कि साध्य के प्रति इनके मन में अनन्य समर्पण-भावना थी। सदना की भांति संत बेनी का जीवन-विवरण भी अप्राप्य है। अनुमान है कि ये 15वीं शताब्दी में विद्यमान रहे होंगे। ’आदिग्रंथ’ में इनके तीन पद संकलित हैं जिनसे स्पष्ट है कि ये साधना-मार्ग की दुरूहता, अध्यात्म की सूक्ष्मता और हठयोग की प्रक्रियाओं से भलीभांति परिचित थे। मूर्तिपूजा, बाहयाचार और आडम्बरों की इन्होंने कटु… (513 more words) …

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – जन्मनाथ

  • संत जन्मनाथ का जन्म 1451 ई. में जोधपुर राज्य के नागौर प्रदेश के पीपासर (अथवा पयासर) ग्राम में राजपूत-परिवार में हुआ। जनश्रुति है कि 34 वर्ष की अवस्था तक इन्होंने एक भी शब्द उच्चरित नहीं किया और चमत्कारित कृत्यों के प्रदर्शन के कारण जनता ने इन्हें जन्भ जी कहना प्रारंभ किया।
  • सिद्धि प्राप्त हो जाने के अनन्तर ये मुनीन्द्र जन्म ऋषि के नाम से विख्यात हुएं इनकी शिक्षा-दीक्षा, विवाह, परिवार-आजीविका आदि के विषय में कोई विशेष विवरण नहीं मिलता। कहा जाता है कि यह आजीवन ब्रह्यचारी रहे। यह भी प्रसिद्ध है कि किन्हीं बाबा गोरखनाथ ने इन्हें दीक्षा प्रदान की… (203 more words) …

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