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भक्तिकाल में सगुण काव्य - गोस्वामी तुलसीदास

  • गोस्वामी तुलसीदास के जीवन-वृत के बारे में अंत: साक्ष्य एवं बहि-साक्ष्य के आधार पर विदव्ानों ने विविध मत प्रस्तुत किये हैं। बेनीमाघवदास-प्रणीत ’मूल गोसाई चरित’ तथा महात्मा रघुबरदास-रचित ’तुलसी चरित’ में गोस्वामी जी का जन्म-संवत्‌ 1554 दिया हुआ है। बेनीमाघवदास जी की रचना में गोस्वामी जी की जन्मतिथि श्रावण शुक्ला सप्तमी का भी उल्लेख है। इस संवत्‌ के अनुसार इनकी आयु 126 - 127 वर्ष की ठहरती है। ’शिवसिंह सरोज’ में इनका जन्म-संवत्‌ 1583 स्वीकार किया गया है। मिरजापुर के प्रसिद्ध रामभक्त पं. रामगुलाम दव्वेदी ने जनश्रुति के आधार पर इनका जन्म-संवत्‌ 1589 स्वीकार किया है। सर जॉर्ज ग्रियर्सन ने… (843 more words) …

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भक्तिकाल में सगुण काव्य - केशवदास

  • इनका जन्म 1555 ई. और मृत्यु 1617 ई. के आसपास हुई थी। ओरछा-नरेश महाराज रामसिंह के भाई इन्द्रजीतसिंह की सभा में इनका अपने पाण्डित्य के कारण अत्यधिक सम्मान था। इनके दव्ारा लिखे गये सात ग्रंथ मिलते हैं- कविप्रिया, रसिकप्रिया, रामचन्द्रिका, वीरसिंहचरित, विज्ञानगीता, रतनबावनी और जहाँगीर जसन्द्रिका।
  • इनमें से रामचन्द्रिका (1601) हिन्दी-रामकाव्य-परम्परा के अंतर्गत एक विशिष्ट कृति है। यह प्रबंधकाव्य 39 प्रकाशों में विभाजित है। अनेक प्रसंग स्पष्टत: प्रसन्नराघव, हनुमन्नाटक, अनर्घराघव, कादम्बरी और नैशध से प्रभावित प्रतीत होते हैं प्रबंधात्मकता की दृष्टि से इसमें अनेक कथा-प्रसंग विश्रृंखलित हैं, उनमें परस्पर क्रमबद्धता भी नहीं है। प्रबंध-कौशल के लिए आवश्यक मार्मिक प्रसंगों की… (7 more words) …

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