CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-मध्यकाल (Middle Era) Revision (Page 10 of 16)

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भक्तिकाल में सगुण काव्य - अग्रदास

  • स्वामी रामानंद की शिष्य-परम्परा में ही रामभक्त कवि अग्रदास हुए। इन्होंने कृष्णदास पयहारी से दीक्षा लेकर शिष्यतत्व स्वीकार किया था। कृष्णदास पयहारी ने जयपुर के समीप गलता नामक स्थान में अपनी गद्दी स्थापित की थी। गलता की गद्दी पर परवर्ती काल में जो शिष्य बैठे, उन्होंने भी भक्ति-साहित्य की विपुल मात्रा में रचना की। अग्रदास 1556 ई. के लगभग विद्यमान थे। इनके अनेक ग्रंथों की चर्चा गलता की गद्दी-परम्परा में आज भी होती है। मुख्य ग्रंथों में ध्यानमंजरी, अष्टयाम, रामभजनमंजरी, उपासना-बावनी और पद

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भक्तिकाल में सगुण काव्य - ईश्वरदास

  • ईश्वरदास की जन्मतिथि उनकी सुप्रसिद्धि कृति ’सत्यवती कथा’ के रचनाकाल (1501) के आधार पर अनुमित की जाती है। ’सत्यवती कथा’ की रचना यदि कवि ईश्वरदास ने युवावस्था में की होगी, तो उनका जन्म 1480 ई. के आसपास माना जा सकता है। ईश्वरदास की रामकथा से संबंद्ध रचना ’भरत मिलाप’ है, जिसका उल्लेख काशी नागरी प्रचारिणी सभा के खोज-विवरण में हुआ है।
  • राम-वनवास के समय भरत अयोध्या में नहीं थे। अपनी ननिहाल से आने पर राम के वनगमन के समाचार से खिन्न हो कर वे विलाप करने लगे और सारी प्रजा उनके साथ दु: खातर हो

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