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भक्तिकाल में संत

  • काव्यधारा के विकास में शताधिक कवियों का योगदान रहा, जितने उपर्युक्त कवियों के अलावा कुछ अन्य को भी पर्याप्त लोकप्रियता प्राप्त हुई इनमें धर्मदास, रज्जब, बावरी साहिबा, सदना, बेनी पीपा, सेन, धन्ना, अंगद शिष्य (सिक्ख गुरु), शेख फरीद, भीषन, वीरभान और निपट निरंजन स्वामी उल्लेखनीय है। संत धर्मदास कबीर के प्रमुख शिष्य थें कबीर-वाणी को ’बीजक’ में संकलित करने का श्रेय इन्ही को प्राप्त है।
  • कबीर की मृत्यु के अनन्तर उनकी गद्दी का उत्तराधिकार भी इन्हीं को मिला था। इनकी भक्ति-भावना और विचारधारा कबीर से भिन्न नहीं है, किन्तु खंडन-मंडन की कटुता इनके यहाँ नहीं मिलती है। लौकिक प्रपंच और… (124 more words) …

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प्रमुख निर्गुण संत कवि – सींगा

  • संत सींगा (1519 - 1659) का जन्म मध्यभारत की रियासत बडवानी के खजूर गांव में एक ग्वाल-परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था से ही वे संसार से विरक्त रहा करते थे। एक बार वे हरसूद से भामगढ़-मार्ग पर जा रहे थे, मार्ग में महाराज ब्रह्यगीर के शिष्य मनरंगीर यह भजन गा रहे थे:

समुझि ले औरे मना भाई, अंत न होय कोई अपणा।

यही माया के फंदे में, तर आन भुलाणा।

  • प्रस्तुत पंक्तियों ने संसार की नि: सारता को उनके हृदय में प्रत्यक्ष रूप से अंकित कर दिया और उन्होंने मनरंगीर को अपना आध्यात्मिक पथ-प्रदर्शक स्वीकार कर लिया। पिपल्या के जंगलों… (201 more words) …

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