CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी सूफी-काव्य (Hindi Sufi Poet) Revision (Page 4 of 4)

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रहस्यवाद

  • जायसी को रहस्यवादी कवि कहा जाता है। यह रहस्यवाद दो प्रकार की होती है- साधनात्मक एवं भावनात्मक।

  • साधनात्मक रहस्यवाद- योग मार्ग ही है। योग मार्ग हठयोग ही है।” हठयोग प्रदीपिका में इसका अर्थ किया हैं-

    “हकार: कीर्तित: सूर्य: ठकार न्द्र उच्यते।

    सूर्याचन्द्र मसोर्योगात्‌ हठयोगी निगद्यते”

  • अर्थात्‌ सूर्य एवं चंद्र के एकीकरण को हठयोग कहते हैं। इसमें अनेक प्रकार के आसन्‌, प्राणायाम एवं मुद्राओं का विधान है। तंत्र एवं रसायन भी साधनात्मक रहस्यवाद है, पर ये निम्न कोटि के हैं। जायसी के ’पद्मा

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