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सूफी प्रेमाख्यानकों का स्वरूप

  • सूफी शाखा का संबंध सूफी संप्रदाय के कुछ भारतीय भावुक कवियों से है। ’सूफी’ शब्द की व्युत्पति कई प्रकार से बताई जाती है

  1. कुछ विद्धानों की धारणा है कि मक्का और मदीना में मस्जिद के सामने एक सुफ्फा (चबूतरा) था, उसी पर जो फकीर बैठते थे, वे सूफी कहलाए। अर्थात उसी को सुफ्फा कहा जाता है।
  2. अन्य विद्धानों का कहना है कि इस शब्द के मूल में ’सफ’ (पंक्ति) है। निर्णय के दिन जो लोग अपने सदाचार एवं व्यवहार के कारण एक पंक्ति में खड़े किए जाएँगे, ये ही वस्तुत: सूफी कहलाते हैं।
  3. बहुत लोगों दव्ारा तो उनके ’सूफी’ कहे… (839 more words) …

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सूफी साहित्य का लक्ष्य

  • सूफी कवियों ने प्रेमाख्यानों की रचना करके इस्लाम धर्म का प्रचार करने का यत्न नहीं किया। उन्होंने प्रेम काव्यों की रचना को यश-प्राप्ति, लोक रंजन तथा आनंद प्राप्ति का लक्ष्य बनाया।
  • प्रेम काव्यों की भाषा बोलचाल की अर्थात्‌ लौकिक अवधी है। उन्होंने काव्य रचना में संगीतात्मकता का ध्यान रखते हुए गजल और कव्वालियों को सूफी साधना का अंग माना है।
  • ज्ञानमार्गी और प्रेममार्गी शाखाएँ भक्तिमार्ग की शाखाओं के रूप में विकसित हुई जिन्होंने उस समय हिन्दू- मुस्लिम एकता की स्थापना में अमूल्य योगदान किया। संत और सूफी काव्यों में प्रेम की महत्ता पर जोर दिया गया है। दोनों ने ही… (687 more words) …

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