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प्रेमाख्यानक काव्य

उपर्युक्त प्रेममयी मूलवृति एवं दार्शनिक चिन्तन पद्धति को ग्राम्य-कथाओं के सहारे सूफी कवियों ने भारत में उपस्थित करना आरंभ किया, उनकी चर्चा करने का अब अवसर है। ये ग्राम्य कथाएँ प्रेममय होती थीं, यही कारण है कि इनकी रचनाएँ प्रेम गाथाएँ कही जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो ऐसे प्रेमाख्यान काव्यों की परंपरा काफी पुरानी हैं।

प्रेम काव्यों की इस धारा का विकास दो रूपों में दिखाई पड़ता हैं-

  1. पहली शुद्ध प्रेम काव्य की और दूसरी सूफी रहस्यों काव्य की।
  2. प्रथम वर्ग के भीतर भी क्रमश: दो रूप मिलते हैं,
  • पहले के प्रेम काव्य तो किसी- किसी लोक प्रसिद्ध… (856 more words) …

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रहस्यवाद

  • जायसी को रहस्यवादी कवि कहा जाता है। यह रहस्यवाद दो प्रकार की होती है- साधनात्मक एवं भावनात्मक।

  • साधनात्मक रहस्यवाद- योग मार्ग ही है। योग मार्ग हठयोग ही है।” हठयोग प्रदीपिका में इसका अर्थ किया हैं-

    ”हकार: कीर्तित: सूर्य: ठकार न्द्र उच्यते।

    सूर्याचन्द्र मसोर्योगात्‌ हठयोगी निगद्यते”

  • अर्थात्‌ सूर्य एवं चंद्र के एकीकरण को हठयोग कहते हैं। इसमें अनेक प्रकार के आसन्‌, प्राणायाम एवं मुद्राओं का विधान है। तंत्र एवं रसायन भी साधनात्मक रहस्यवाद है, पर ये निम्न कोटि के हैं। जायसी के ’पद्मावत’ में वासुदेवशरण अग्रवाल ने विस्तारपूर्वक यह दिखाया है कि जायसी में किस प्रकार तांत्रिक एवं रासायनिक प्रक्रिया का… (298 more words) …

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