CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी संत-काव्य (Hindi Saint Poet) Revision (Page 5 of 6)

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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान - संत रविदास या रैदास

ज्ञानाश्रयी शाखा में संत रविदास का स्थान प्रतिष्ठापूर्ण है। ये स्वामी रामानन्द के शिष्य अर्थात कबीर के गुरु भाई थे। उनका जन्म काशी में सं. 1434 माघी पूर्णिमा में हुआ था। रैदास जाति के चमार थे। सतसंग के माध्यम से उन्होंने दार्शनिक ज्ञान प्राप्त किया था। आचार्य शुक्ल का अनुमान है कि रैदास कबीर के बाद स्वामी रामानंद के शिष्य हुए।

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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान - दादू दयाल

  • दादू पंथ के प्रवर्तक दादू दयाल का जन्म सं. 1601 में गुजरात के अहमदाबाद नगर में हुआ। कबीर की जन्म कथा की तरह दादू के जन्म के संबंध में दादूपंथियों में एक जनश्रुति प्रसिद्ध है। इस दन्त कथा के अनुसार लोदीराम नाम के एक नागर ब्राह्यण को साबर मती नदी में एक बालक बहता हुआ मिला जिसे घर लाकर लोदी राम ने उसका पालन पोषण किया। दादू के एक शिष्य ने दादू को मुस्लिम धुनिया कहा है और उनका नाम भी दाऊद बताया गया है। दादू दयाल के गुरु कौन थे यह निश्चिय पूर्वक नहीं कहा जा सकता। कबीर के पदों में दादू का

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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान – मलूकदास

  • निर्गुण शाखा के संतों में संत मलूक का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में ‘कड़ा’ नामक स्थान में सं. 1631 में वैशाख कृष्ण 15 अमावस्या के दिन हुआ था। इनके पिता सुन्दरलाल खत्री थे। महात्मा मुरारी से इन्होंने धर्म-दीक्षा ली। गृहस्थ जीवन का पालन करते हुए मलूक दास ने संतों के साहित्यिक जीवन का निर्वाह किया है। इनके नाम से एक अलंग पंथ प्रचलित हुआ है। दीर्घकालीन जीवन बिताकर सं. 1739 में मलूकदास ने परलोक गमन किया। मलूकदास मुगल बादशाह औरंगजेब के समकालीन थे। ‘ज्ञ

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