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भारतीय धर्म साधना में संत कवियों का स्थान

  • वस्तुत: संत कोई व्यक्ति या संप्रदाय -विशेष नहीं है। यह तो एक ऐसी भाव धारा है जिसमें हर युग के कवियों ने अवगाहन किया है। वर्ग संप्रदाय, मत-मतान्तर और जाति-धर्माडम्बरों का विरोध करने वाले ये संत तो मूलत: मंत्रदृष्टा थे समाज और युग-स्थितियों की आंख खोलकर देखने वाले थे। ये संत बुरे को बुरा कहने में निर्भीक, वैयक्तिक दृष्टि से नैतिक और समानतावादी थे। जिन्होंने अपनी लोक-कल्याणी वाणी से ”सभी… (382 more words) …

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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान – मलूकदास

  • निर्गुण शाखा के संतों में संत मलूक का भी महत्वपूर्ण स्थान है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में ’कड़ा’ नामक स्थान में सं. 1631 में वैशाख कृष्ण 15 अमावस्या के दिन हुआ था। इनके पिता सुन्दरलाल खत्री थे। महात्मा मुरारी से इन्होंने धर्म-दीक्षा ली। गृहस्थ जीवन का पालन करते हुए मलूक दास ने संतों के साहित्यिक जीवन का निर्वाह किया है। इनके नाम से एक अलंग पंथ प्रचलित… (402 more words) …

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