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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान - गुरु नानक देव

  • निर्गुण भक्तिधारा की ज्ञान मार्गी शाखा के संतों में सिक्ख धर्म के संस्थापक विख्यात संत गुरु नानक देव का नाम अग्रगण्य है। इनके जन्म से संबंधित एक कहानी को डॉ. राम कुमार वर्मा ने अपने इतिहास में उजागर किया है।

  • राजा जनक ने एक बार नर्क की यात्रा की थी और अपने पुण्य से सतयुग, त्रेता और दव्ापर के पापियों का उद्धार कर दिया था। वे उस समय कलियुग के

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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान - संत रविदास या रैदास

ज्ञानाश्रयी शाखा में संत रविदास का स्थान प्रतिष्ठापूर्ण है। ये स्वामी रामानन्द के शिष्य अर्थात कबीर के गुरु भाई थे। उनका जन्म काशी में सं. 1434 माघी पूर्णिमा में हुआ था। रैदास जाति के चमार थे। सतसंग के माध्यम से उन्होंने दार्शनिक ज्ञान प्राप्त किया था। आचार्य शुक्ल का अनुमान है कि रैदास कबीर के बाद स्वामी रामानंद के शिष्य हुए।

संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान - दादू दयाल

  • दादू पंथ के प्रवर्तक दादू दयाल का जन्म सं. 1601 में गुजरात के अहमदाबाद नगर में हुआ। कबीर की जन्म कथा की तरह दादू के जन्म के संबंध में दादूपंथियों में एक जनश्रुति प्रसिद्ध है। इस दन्त कथा के अनुसार लोदीराम नाम के एक नागर ब्राह्यण को साबर मती नदी में एक बालक बहता हुआ मिला जिसे घर लाकर लोदी राम ने उसका पालन पोषण किया। दादू के एक शिष्य

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