Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 450.00 or

हिन्दी संत काव्य

  • हिन्दी साहित्य में भक्ति का उदय प्राचीन भारतीय दार्शनिक एवं सांस्कृतिक परंपरा की देन है। आचार्य हजारी प्रासद दव्वेदी जी ने उचित ही कहा है कि भक्ति साहित्य मनुष्य जीवन का निश्चित लक्ष्य और आदर्श है, शुद्ध सात्विक जीवन का साधन है, भगवान के निर्मल चरित्र और सरस लीलाओं का गान है। इस साहित्य को प्रेरणा देने वाला तत्व भक्ति है। इसलिए यह साहित्य अपने पूर्ववर्ती साहित्य से सर्वथा भिन्न है।

    भक्तिकाल सन्‌ 1400 से 1700 तक माना जाता है। साहित्य के इतिहासकारों ने इस काल को दो भागों में विभाजित किया है:

  1. निर्गुणोपसना काल
  2. सगुणोपासना काल

भारत में प्रारंभ… (193 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

निर्गुण भक्ति

  • इस्लाम के अनुसार भी अल्लाह एक हैं, इसके अलावा दूसरा कोई नहीं। हैं। इस्लाम के अनुसार खुदा सर्वशक्तिमान है। एक विशेषत स्थान सातवें स्थान पर रहता हैं। इस्लाम के संपर्क और प्रभाव के कारण संतों की विचारधारा एकेश्वरवाद से प्रभावित हुई। इस्लाम की देन निषेधात्मक अधिक रही, विधेयात्मक कम। मूर्तिपूजा तथा अवतारवाद के बहिष्कार का मूलाधार इस्लाम धर्म में ही है। इस्लाम ने सामाजिक असमानता को दूर करने की भी चेष्टा की। सत्य यह है कि एकेश्वरवाद उस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता थी। अत: कबीर प्रभृति संत कवियों ने हिन्दू-मुसलमान दोनों को एकेश्वरवाद का संदेश सुनाया, जिसके फलस्वरूप जनता… (229 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

Sign In