CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी संत-काव्य (Hindi Saint Poet) Revision (Page 2 of 6)

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उपनिषद शंकराचार्य का अद्धैतवाद

  • का मुल सिद्धांत था अहं अथवा ब्रह्य ही है इसके अतिरिक्त दूसरा कोई नहीं। दर्शन, नाथ-पंथ, इस्लाम धर्म तथा सूफी-दर्शन। संतों के चिन्तन, जीवन-दर्शन और काव्यधारा पर उपनिषदों का व्यापक प्रभाव पड़ा है उपनिषदों में प्रतिपादित ब्रह्य, जीव, जगत और माया संबंधी विचारधारा के साथ ही ब्रह्य के स्वरूप -वर्णन से सम्बद्ध उपमानों और अप्रस्तुत योजनाओं को संत कवियों दव्ारा प्राय: उसी रूप में ग्रहण कर लिया गया है। उपनिषदों के अनन्तर संत-काव्यधारा और संत-दर्शन का मुख्य आधार हैं-शंकर का अद्धैत -दर्शन। संतों

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निर्गुण भक्ति

  • इस्लाम के अनुसार भी अल्लाह एक हैं, इसके अलावा दूसरा कोई नहीं। हैं। इस्लाम के अनुसार खुदा सर्वशक्तिमान है। एक विशेषत स्थान सातवें स्थान पर रहता हैं। इस्लाम के संपर्क और प्रभाव के कारण संतों की विचारधारा एकेश्वरवाद से प्रभावित हुई। इस्लाम की देन निषेधात्मक अधिक रही, विधेयात्मक कम। मूर्तिपूजा तथा अवतारवाद के बहिष्कार का मूलाधार इस्लाम धर्म में ही है। इस्लाम ने सामाजिक असमानता को दूर करने की भी चेष्टा की। सत्य यह है कि एकेश्वरवाद उस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता थी। अत: कबीर प्रभृति संत कवि

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