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संत परंपरा में कवियों ने महत्वपूर्ण योगदान - धर्मदास

  • कबीरदास के प्रिय शिष्य और उनके उत्तराधिकारी धर्मदास का जन्म सं. 1475 में बाँधव गढ़ में एक वैश्य परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे साधु सत्संगति में लीन रहते थे। उनमें भक्तिभाव की प्रधानता थी। कबीर के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने उनसे निर्गुण मत का प्रचार किया। कबीरदास का स्वर्गवास होने पर उन्हें कबीर पंथी गद्दी प्राप्त हुई।

  • संत धर्मदास दीर्घायु पाकर परलोकवासी हुए। छत्तीसगढ़ की गद्दी उनकी ही है। उनकी रचनाओं में ’सुख निधान’ का नाम बहुत प्रसिद्ध है। कबीरदास की भाँति धर्मदास ने भी आत्मा और परमात्मा का विरह वर्णन किया हैं। इसी प्रकार कबीर… (96 more words) …

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उपनिषद शंकराचार्य का अद्धैतवाद

  • का मुल सिद्धांत था अहं अथवा ब्रह्य ही है इसके अतिरिक्त दूसरा कोई नहीं। दर्शन, नाथ-पंथ, इस्लाम धर्म तथा सूफी-दर्शन। संतों के चिन्तन, जीवन-दर्शन और काव्यधारा पर उपनिषदों का व्यापक प्रभाव पड़ा है उपनिषदों में प्रतिपादित ब्रह्य, जीव, जगत और माया संबंधी विचारधारा के साथ ही ब्रह्य के स्वरूप -वर्णन से सम्बद्ध उपमानों और अप्रस्तुत योजनाओं को संत कवियों दव्ारा प्राय: उसी रूप में ग्रहण कर लिया गया है। उपनिषदों के अनन्तर संत-काव्यधारा और संत-दर्शन का मुख्य आधार हैं-शंकर का अद्धैत -दर्शन। संतों की विवर्त-भावना, प्रतिबिम्ब-भावना, प्रणव-भावना, साधना-पक्ष और भक्ति-पद्धति पर आचार्य शंकर की विचारधारा का व्यापक प्रभाव पड़ा है।… (174 more words) …

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