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संत काव्य की प्रमुख विशेषताएँ

1 निराकार की उपासना-

संत कवि ईश्वर के निर्गुण रूप का प्रतिपादन करते थे। उन्होंने सगुण भक्ति का विरोध किया हैं। इनके राम अयोध्या नरेश दशरथ पुत्र राम नहीं अपितु कण-कण व्यापी राम हैं। वे अनुभव गम्य और अवर्णनीय हैं।

2 भावपक्ष संबंधी निर्गुण की उपासना

सभी संत कवि निर्गुण के उपासक है। उनका ब्रह्य अविगत हैं। उसका ना तो कोई रूपाकार है और न निश्चित आकृति। वह तो अनुपम, सर्वव्यापक, सर्व-शक्तिमान और सर्वसुलभ है। घट-घट में बसता है और बाह्येन्द्रियों से परे हैं। स्वयं संतकवि कबीर के शब्दों में-

’जाके मुख माथा नहीं, नाहीं रूप कुरूप।

पहुप बास… (3048 more words) …

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कबीर पंथ

  • कबीर का जन्म एक ज्योति से मानते हैं। जो काशी के लहरतारा तालाब के पास प्रकट हुई थी। परन्तु उनके जन्म के संबंध में एक जनश्रुति प्रसिद्ध है जिसके अनुसार स्वामी रामानन्द ने अपने एक भक्त की विधवा कन्या को भूल से पुत्रवती होने का वरदान दे दिया था। परिणास्वरूप एक बालक का जन्म हुआ। लोकापवाद से बचने के लिए, नवजात बालक को विधवा ब्राह्यणी ने लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक दिया। संयोग से उसी समय अली या नीरू (नीरूद्दीन) नामक एक मुसलमान जुलाहा अपनी पत्नी नीमा के साथ उधर से जा रहा था। जुलाहा दंपती उस बालक को… (574 more words) …

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