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रामभक्ति शाखा के अन्य कवि

  • स्वामी अग्रदास- रामानन्द की शिष्य परंपरा में अग्रदास का नाम सम्मान पूर्वक लिया जाता है। इनके गुरु स्वामी कृष्णदास पयहारी थे। स्वामी अग्रदास राजस्थान में गलता नाम के स्थान की गद्दी पर आसीन थे। उन्होंने चार पुस्तकों की रचना की।

  1. हितोपदेश उपखाणां बावनी
  2. ध्यान मंजरी
  3. राम ध्यान मंजरी
  4. कुंडलिया।
  • नाभादास जी- अग्रदास के प्रिय शिष्य नाभादास राम के परम भक्त थे और साधु-संतों में अपना जीवन बिताते थे। भक्ति ग्रंथों में नाभादास दव्ारा लिखित भक्तमाल बहुत प्रसिद्ध है। इसमें 200 भक्तों के चरित्र का उल्लेख 316 छप्पयों में किया गया है। यद्यपि उनका पूर्ण विवरण तो नहीं दिया गया… (337 more words) …

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परिचय

  • पौराणिक युग में भक्ति का उद्भव हुआ। विष्णुपुराण और भागवत पुराण में भक्ति के सूत्र भली प्रकार से देखे जा सकते हैं। दक्षिण के आलवार भक्तों ने भक्ति के मूल भाव को पुराणों से ग्रहण कर पूर्ण विकसित किया है। आचार्य रामानुज ने दक्षिण में विष्णु पुराण को आधार बनाकर अपने भक्ति संप्रदास विशिष्टाद्धैत की स्थापना की। उनके मत से जगत के सभी जीव ब्रह्य के ही अंश हैं। सारे प्राणी उसी ब्रह्य से उत्पन्न होते है और अंत में उसी में समा जाते हैं। इस प्रकार ब्रह्य अंशी और जीव अंश है। अंशी से मिलकर ही जीव का उद्धार… (927 more words) …

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