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अष्ट छाप के अन्य कवि - चतुर्भुजदास

  • ये कुंभनदास के पुत्र थे, गोस्वामी विट्‌ठनाथ के शिष्य थे। अष्टछाप के कवियों में उनको सम्मानर्पूक स्थान प्राप्त था। इनकी बनाई हुई तीन रचनाएँ प्राप्त हुई है- दव्ादश यश, भक्ति प्रताप, हित जू को मंगल। माखन-चोरी संबंधी प्रसंग को लेकर उन्होंने अनेक सुन्दर पद लिखे। एक पद में गोपी यशोदा से कृष्ण की शिकायत कर रही है वो इस प्रकार हैं-

    ”जसोदा! कहा कहौं हौं बात?

    तुम्हरे सुत के करतब मोपै, कहत कहे नहिं जात।।

    भाजन फोरि, छारि सब गोरस, लै माखन दधि खात।

    जो बरजों तो आंखि दिखावै, रंचहु नाहिं सकात।।

    और अटपटी कहं लौ बरानौं, छुवत पानि सो… (48 more words) …

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कृष्ण काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ)

  • उपर्युक्त कृष्णकाव्य की सर्वप्रथम प्रवृत्ति है- कृष्ण के लीला-रूप का अंकन। यूं परंपरा में कृष्ण और उनका चरित्र अपने विविध रूपों में चला आ रहा था, मगर इन कवियों ने कृष्ण के बाल और किशोर रूपों का ग्रहण किया वह भी मुख्यत: लौकिक रूप में है। इनके कृष्ण मुख्यत: बाल सुलभ क्रीड़ाएँ करने वाले साधारण ग्रामीण बालक हैं या फिर ’ रसिक शिरोमणि गोपी वल्लभ। यूं कहीं-कहीं उनका लोकनायक और ब्रह्यत्व भी मुखर हुआ मिलता है, यथा कंसादि-वध और विनय पदों में हैं। दृष्टव्य बात यह है कि कृष्ण जीवन के इन दोनों पक्षों का जितना स्वाभाविक, यथार्थ मनोविज्ञान सम्मत… (1066 more words) …

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