CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी कृष्ण-काव्य (Hindi Krishna Poet) Revision (Page 9 of 14)

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अष्ट छाप के अन्य कवि - चतुर्भुजदास

  • ये कुंभनदास के पुत्र थे, गोस्वामी विट्‌ठनाथ के शिष्य थे। अष्टछाप के कवियों में उनको सम्मानर्पूक स्थान प्राप्त था। इनकी बनाई हुई तीन रचनाएँ प्राप्त हुई है- दव्ादश यश, भक्ति प्रताप, हित जू को मंगल। माखन-चोरी संबंधी प्रसंग को लेकर उन्होंने अनेक सुन्दर पद लिखे। एक पद में गोपी यशोदा से कृष्ण की शिकायत कर रही है वो इस प्रकार हैं-

    “जसोदा! कहा कहौं हौं बात?

    तुम्हरे सुत के करतब मोपै, कहत कहे नहिं जात।।

    भाजन फोरि, छारि सब गोरस, लै माखन दधि खात।

    जो बरजों तो आंखि दिखावै, रंचहु नाहिं सकात।।

    और

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हित हरिवंश राधावल्लभ संप्रदाय (हित संप्रदाय)

  • अष्ट छाप कवियों के अलावा कुछ फुटकर रचनाएँ भी उपलब्ध होती हैं। इनमें भाषा एवं कविता साधारण कोटि की हैं।

    इन्होंने राधावल्लभी संप्रदाय की स्थापना की। ये हिन्दी और संस्कृत के अच्छे विद्धान और कवि थे। इनकी रचनाएँ निम्न हैं-

  • राधा सुधानिधि-संस्कृत में 170 श्लोको का संग्रह है।
  • हित चौरासी- ब्रजभाषा में राधाकृष्ण की भक्ति संबंधी 84 पदों का संग्रह हैं।

मध्यप्रदेश एवं दक्षिण में कृष्ण संप्रदाय ने अनेक संप्रदायों का रूप धारण किया जो निम्नलिखित हैं-

  1. दत्तात्रेय संप्रदाय
  2. माधव संप्रदाय
  3. विष्णु स

… (1700 more words) …

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