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अष्ट छाप के अन्य कवि - गोविन्दस्वामी

  • गोविन्दस्वामी का जन्म राजस्थान के भरतपुर राज्य के अन्तर्गत आंतरी गांव में 1505 ई. में हुआ था। इनके परिवार के विषय में प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, किन्तु इनकी रचनाओं तथ प्रवृत्तियों से यह स्पष्ट है कि यह गृहस्थ थे और इनकी एक पुत्री थी। संसार से वैराग्य होने के बाद ये ब्रजमंडल के महावन नामक स्थान में आकर बस गये थे और वहीं रहकर भजन कीर्तन में लीन रहते थे। वार्ता-ग्रंथों से विदित होता है कि यह शिक्षित थे और संगीतशास्त्र का भी इन्हें ज्ञान था। पद-रचना करके यह स्वयं उन्हें गाते थे। और अन्य भक्तों को भी पद-गायन… (254 more words) …

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हित हरिवंश राधावल्लभ संप्रदाय (हित संप्रदाय)

  • अष्ट छाप कवियों के अलावा कुछ फुटकर रचनाएँ भी उपलब्ध होती हैं। इनमें भाषा एवं कविता साधारण कोटि की हैं।

    इन्होंने राधावल्लभी संप्रदाय की स्थापना की। ये हिन्दी और संस्कृत के अच्छे विद्धान और कवि थे। इनकी रचनाएँ निम्न हैं-

  • राधा सुधानिधि-संस्कृत में 170 श्लोको का संग्रह है।
  • हित चौरासी- ब्रजभाषा में राधाकृष्ण की भक्ति संबंधी 84 पदों का संग्रह हैं।

मध्यप्रदेश एवं दक्षिण में कृष्ण संप्रदाय ने अनेक संप्रदायों का रूप धारण किया जो निम्नलिखित हैं-

  1. दत्तात्रेय संप्रदाय
  2. माधव संप्रदाय
  3. विष्णु संप्रदाय
  4. निम्बार्क संप्रदाय
  5. चैतन्य संप्रदाय
  6. वल्लभा संप्रदाय
  7. राधावल्लभी संप्रदाय
  8. हरिदासी संप्रदाय।

इनमें राधावल्लभी संप्रदाय के आचार्य थे श्री… (172 more words) …

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