CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी कृष्ण-काव्य (Hindi Krishna Poet) Revision (Page 6 of 14)

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अष्ट छाप के अन्य कवि - कुम्भनदास

  • सांसारिक जीवन से अलग होकर कुंभनदास कृष्ण भक्ति में पूर्ण रूप से लीन थे और संतों जैसा जीवन बिताते थे। वैसे तो कुंभनदास जी की कोई रचना उपलब्ध नहीं है। किन्तु उनके दव्ारा रचित स्फुट पद अष्टछाप के साहित्य में मिल जाते हैं। उन्होंने बाल कृष्ण के जीवन और कृष्ण की रासलीलाओं का रोचक वर्णन अपने काव्य में किया है जिसमें वात्सल्य और श्रृंगार रस का चित्रण हुआ है।

  • कुम्भनदास (1468 - 1583) का चरित ’ चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ के अनुसार संकलित किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने संबंध में कहीं कुछ

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अष्ट छाप के अन्य कवि - परमानंदास

  • परमानन्दास अष्टछाप के कवियों में प्रमुख स्थान रखते हैं। इनका जन्म कन्नौज (उत्तर प्रदेश) में एक निर्धन कान्यकुबज ब्राह्यण-परिवार में हुआ था। इन्होंने भी अपनी रचनाओं में अपने विषय में कुछ नहीं लिखा हैं। साम्प्रदायिक अनुश्रुतियों के आधार पर इन्हें वल्लभाचार्य से 15 वर्ष छोटा कहा जाता है, अत: इनका जन्म काल 1493 ई. स्थिर होता है। बाल्यकाल से ही उनकी रुचि भगवद् भक्ति में थी अत: अल्पायु में ही इन्होंने भक्ति मार्ग को ग्रहण कर लिया। काव्य-रचना की ओर ध्यान जाना स्वाभाविक था। इन्होंने गृहस्थाश

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