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अष्ट छाप के अन्य कवि - छीतस्वामी

  • छीतस्वामी के जीवन-वृत्त के विषय में कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं थे। ये अत्यंत भावुक और संवदेनशील प्रवृत्ति के परम भक्त थे। नहाने से पैरो का स्पर्श यमुना के जल से होगा इसलिए छीतस्वामी यमुना के जल में नहाते नहीं थे। पर भावुकतावश यमुना की रेत में लौटकर फिर कुएँ के जल से स्नान कर लेते थे। अपने गुरु गोस्वामी विट्‌ठनाथ के प्रति उनके हृदय में असीम श्रद्धा भाव था। उनके विरूद्ध वे एक शब्द भी सुनने तैयार नहीं थे। छीत स्वामी के यजमान अबकर के मंत्री बीरबल ने एक बार गोस्वामी विट्‌ठनाथ के देवत्व में अविश्वास प्रकट किया तो… (279 more words) …

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अष्ट छाप के अन्य कवि - कुम्भनदास

  • सांसारिक जीवन से अलग होकर कुंभनदास कृष्ण भक्ति में पूर्ण रूप से लीन थे और संतों जैसा जीवन बिताते थे। वैसे तो कुंभनदास जी की कोई रचना उपलब्ध नहीं है। किन्तु उनके दव्ारा रचित स्फुट पद अष्टछाप के साहित्य में मिल जाते हैं। उन्होंने बाल कृष्ण के जीवन और कृष्ण की रासलीलाओं का रोचक वर्णन अपने काव्य में किया है जिसमें वात्सल्य और श्रृंगार रस का चित्रण हुआ है।

  • कुम्भनदास (1468 - 1583) का चरित ’ चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ के अनुसार संकलित किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने संबंध में कहीं कुछ नहीं लिखा। ’भक्तमाल’ की टीकाओं में भी… (402 more words) …

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