CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी कृष्ण-काव्य (Hindi Krishna Poet) Revision (Page 5 of 14)

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प्रमुख कृष्ण भक्त कवि और उनके काव्य - सूरदास

  • कृष्ण साहित्य में जिन कवियों की महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है उनमें सूरदास सर्वोच्च सीढ़ी पर विराजमान हैं। कृष्णभक्ति साहित्य में सूरदास बेजोड़ कवि माने जाते हैं। उन्हें हिन्दी साहित्यकाश का सूर्य कहा जाता हैं। किन्तु खेद की बात है कि इस महाकवि के जीवन वृत्त की अधूरी जानकारी ही उपलब्ध हैं।
  • सूरदास (वि. सं. 1540 से 1620) का जन्म स्थान अनिर्णित है। विभिन्न स्त्रोत विभिन्न प्रकार की बात करते हैं। कोई तो इनका जन्म स्थान ’सीही’ बताता है और कोई रूनकता। असल में, इधर की खोजों से सब मिलाकर

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सूरादास की विशेषताएँ

  • सूरदास की सबसे बड़ी विशेषता है- मौलिकता और स्वच्छन्दता। तुलसी की भाँति न तो इन्होंने ’नाना पुराण निगमागम’ छाना था और न बाह्य संसार को देखने के लिए आँखे ही खोल रखी थीं, इसलिए इनका जो कुछ है वह अपना है। सूर प्रभावित होते, पर लेते नहीं, तुलसी में दोनों हैं। तुलसी की प्रतिभा आश्रय पाकर फेलती है। गीतावली में अवसर मिलने पर भी तुलसी की मौलिक सूझ के दर्शन न हुए। हाँ, तुलसी में परिष्कार की विशेषता अवश्य हैं।
  • विषय के अतिरिक्त भाषा एवं शैली में भी मौलिकता एवं नैसर्गिता है। सूर ने जिस भाषा को लिय

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