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आदिकालीन कृष्ण काव्य

हिन्दी का आदिकालीन मुख्यत: वीरतामूल काव्य रचनाआंे से युक्त था किंतु श्रृंगार का भी यहाँ र्प्याप्त मात्रा में अंकन किया गया। श्रृंगार का मुख्य आलंबन रहे-राधा-कृष्ण और उनकी प्रेम लीलाएँ जो मूलत: लोक परंपरा की देन थीं। जयदेव का ’गीत-गोविंद’ ही इनका पथ-प्रदर्शक था?

अन्य फुटकर कवि - रहीम

  • रहीम ने जो लोकप्रियता प्राप्त की वह बहुत कम लोगों को मिलती है। कृष्ण-भक्ति के साथ ही रहीम के दोहे जीवन के व्यावहारिक पक्ष को प्रस्तुत करते हैं।

  • इनके अतिरिक्त आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपने इतिहास में इस काल के कवियों की सूची में निम्नलिखित नाम दिए है।

  • छीहल, लालचदास, कृपाराम, नरहरि बंदीजन, नरोत्तमदास, आलम, मनोहर कानि, बलभद्र मिश्र, जमाल, केशवदास, कादिर, मुबारक, सेनापति, बनारसीदास, पुहकर आदि।

  • ये एक प्रेमी जीव थे, जिसका लौकिक प्रेम अंत में परलोक की ओर उन्मुख हो गया- इश्क मिजाजी इश्क इकीकी में परिणत हो गया। प्राय: प्रसिद्ध भक्तों की यही स्थिति है। सूरदास, नंददास,… (844 more words) …

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अन्य फुटकर कवि - केशवदास (1612 - 74)

  • आचार्य केशवदास पूर्व चर्चित बलभ्रद मिश्र के भाई एवं ओरछा नरेश महाराज रामसिंह के भाई इंद्रजीत के यहां सभासद् थे। इस दरबार में इनकी प्रतिष्ठा व्यास एवं आचार्य दोनों रूपों में थी। संगीत पंडितों की यहाँ मंडली थी। पतुरियों का आचार्यत्व इन्हें सौंपा गया था। प्रवीणराय इनकी शिष्य भी थी। रीति ग्रंथ का आविर्भाव कृपाराम एवं बलभ्रद मिश्र ने थोड़ा बहुत कर दिया था। परिस्थिति भी केशव के समक्ष अध्यापक की थी, जिसे कवि-शिक्षा ग्रंथ लिखना चाहिये।

    आचार्यत्व की दृष्टि से जब हम केशवदास पर विचार करते हैं, तो जो सबसे पहले बात आती हैं, वह यह कि ये विभिन्न… (1230 more words) …

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