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अन्य फुटकर कवि - मीराबाई

  • भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त मीराबाई का स्थान कृष्णोपासक भक्त कवियों में बहुत ऊँचा है। मीरा की भक्ति में निर्गुण और सगुण, राम और कृष्ण भक्ति के सभी तत्वों तथा दार्शनिक विचारधाराओं का समावेश हुआ हैं। मीरा ने माधुर्य भाव को अपने काव्य का विषय बनाया। लोक-लाज को त्याग उन्होंने अंसुवन के जल से प्रेम की बेल को बोया। उन्होंने रैदास को अपना गुरू माना है।

    ”गुरु मिलिया रैदास, दीन्हीं ज्ञान की गुटकी।”

  • उन्होंने मथुरा, गोकुल, वृंदावन आदि कृष्ण की लीला स्थलियों की यात्रा की। साधु संगति में उनकी रुचि थी।

  • संत रविदास की शिष्या थीं। संत रैदास के नाम… (683 more words) …

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भक्तिकालीन कृष्ण काव्य

  • कृष्ण काव्य का सर्वाधिक गुण-मात्रा भक्ति काल में विकास हुआ मिलता है। इसमें एक और तुलसी जैसे रामभक्त कवियों ने इसको अपनाया (यथा ’कृष्ण गीतावली’) तो दूसरी ओर कबीर और जायसी जैसे निर्गुण कवियों ने भी इनको अपने-अपने ग्रंथों में यदा-कदा उल्लखित किया। कृष्णभक्ति शाखा तो इससे पूर्ण-रूपेण ओत-प्रोत है ही।

  • महाकवि सूरदास इसी के सर्वप्रधान और कृष्ण काव्य के सनातन प्रणेता हैं। प्रमाण है- उनकी दस हजार से भी अधिक पदों की गीतिकाव्य रचना ’सूरसागर’। सूरदास ने गोपाल कृष्ण के गोकुल, वृन्दावन और मथुरा के जीवन से संबंधित संपूर्ण आख्यान को ’सूरसागर’ में एक गति -प्रबंध का रूप… (144 more words) …

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