Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 450.00 or

कृष्ण भक्ति शाखा के भाग

  • सगुण धारा की दो शाखाएँ हैं। राम भक्ति शाखा एवं कृष्ण भक्ति शाखा। प्रथम शाखा के प्रतिनिधि कृतिकारों की चर्चा पूर्वाध्याय में की जा चुकी है, सम्प्रति इस कृष्ण भक्ति शाखा के साहित्यिक विकास का परिचय दिया जा रहा है। इस काल का यह धार्मिक साहित्य की दार्शनिक पीठिका पर सुस्थिर है। महाप्रभु के जिन सिद्धांतों का अनुगमन कर इस काल के कवियों ने साहित्य के भंडार का समृद्ध किया, उन सिद्धांतों की चर्चा पहले की जानी आवश्यक है।

  • शुद्धाद्धैत वादी दर्शन

    महाप्रभु का सिद्धांत शुद्धाद्धैत के नाम से विख्यात है। इनके मत में शंकर के शुद्धाद्धैतवाद की भांति यह… (319 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

अष्ट छाप के अन्य कवि - कृष्णदास

  • कृष्णदास अधिकारी के नाम से विख्यात अष्टछापी भक्त कवि के संबंध में अभी तक प्रामाणिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। डॉ. दीनदयालु गुप्त ने ’अष्टछाप और वल्लभ-सम्प्रदाय’ ग्रंथ में इनका परिचय लिखते हुए ’चौरासी वैष्णवन की वार्ता’ और ’दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता’ को ही प्रमाण माना है। उनके लेखानुसार कृष्णदास ’कुनबी’ जाति के थे, जो शुद्र जातियों में परिगणित की जाती है। इनका जन्म गुजरात में राजनगर राज्य (अहमदाबाद) के चिलोतरा गांव में 1496 ई. में हुआ था। इनके पिता गांव के मुखिया थे। कृष्णदास बाल्यावस्था में घर छोड़कर ब्रज में आ गये थे अपनी बुद्धि और भक्ति… (447 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In