CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी कृष्ण-काव्य (Hindi Krishna Poet) Revision (Page 11 of 14)

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भक्तिकालीन फुटकर कवि

कबीर, तुलसीदास, सूरदास, जायसी, मीराबाई जैसी काव्य प्रतिभाएँ भक्तिकालीन प्रासाद की आधारशिला के रूप में रहीं है। राजनैतिक स्थिरता और राज्याश्रय ने काव्य-सृजन को प्रेरणा दी। प्रबंध काव्य और मुक्तक रचनाओं के दव्ारा खुल गए। भक्त कवियों की दिव्य वाणी के समानान्तर पहले से चली आ रही परंपरा भी गतिमान रही जिसमें रहीम, नरहरि, गंग, नरोत्तम दास आदि अनेक भावुक कवियों ने काव्य क्षेत्र में अपना कौशल दिखाया हैं। ऐसे कुछ कवियों का परिचय निम्न प्रकार है।

भक्तिकाल के अन्य प्रमुख फुटकर कवि इस प्रकार हैं-

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अन्य फुटकर कवि - मीराबाई

  • भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त मीराबाई का स्थान कृष्णोपासक भक्त कवियों में बहुत ऊँचा है। मीरा की भक्ति में निर्गुण और सगुण, राम और कृष्ण भक्ति के सभी तत्वों तथा दार्शनिक विचारधाराओं का समावेश हुआ हैं। मीरा ने माधुर्य भाव को अपने काव्य का विषय बनाया। लोक-लाज को त्याग उन्होंने अंसुवन के जल से प्रेम की बेल को बोया। उन्होंने रैदास को अपना गुरू माना है।

    “गुरु मिलिया रैदास, दीन्हीं ज्ञान की गुटकी।”

  • उन्होंने मथुरा, गोकुल, वृंदावन आदि कृष्ण की लीला स्थलियों की यात्रा की। साधु संगति में उनकी र

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