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अष्ट छाप के अन्य कवि - नन्ददास

  • अष्टछाप के कवियों में नन्ददास का स्थान काव्य-सौष्ठव और भाषा की प्रांजलता की दृष्टि से सूरदास के बाद समझना चाहिए। ये तुलसीदास के गुरुभाई थे। गोस्वामी विट्‌ठनाथ के शिष्य नन्दास को पुष्टिमार्ग में दीक्षित किया गया था। नन्ददास बहुमुखी प्रतिभा के भक्त कवि थे। इनके जीवनवृत्त के विषय में भी बहुत अधिक मतभेद पाया जाता है। इनका कुछ परिचय ’दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता’ और अष्टसखान की वार्ता में उपलब्ध होता है। इन वार्ताओं के आधार पर यह प्रतीत होता है कि नन्ददास गोस्वामी विठ्ठलनाथ के शिष्य बनने से पूर्व लौकिक वृत्ति के व्यक्ति थे। इनका निवास-स्थान रामपुर लिखा… (1141 more words) …

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अन्य फुटकर कवि - सेनापति

  • सेनापति (वि. सं. 1646 के आस-पास) - ये परशुराम के पौत्र, गंगाधर के पुत्र एवं हीरामणि दीक्षित के शिष्य थे। जाति के ये काव्यकुब्ज ब्राह्यण थे और निवास स्थान अनूप शहर था। ये बड़े ही सहृदय एवं भावुक कवि थे। साक्षात्कार कर उसका हृदयग्राही वर्णन काव्य में आलंबन रूप में किया है। उनके ऋतु वर्णन में कृत्रिमता नहीं वे राम के भक्त थे उनके रामचरित संबंधी पद प्रभावपूर्ण हैं। सेनापति की भाषा मर्मस्पर्शनी और प्रभावशालनी है। माधुर्य से ओत-प्रोत उनकी भाषा में लालित्य और प्रांजलता के गुण विद्धान हैं। काल-क्रम के अनुसार सेनापति सगुणधारा के अंतर्गत आते हैं परन्तु उनकी… (1258 more words) …

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