CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी कृष्ण-काव्य (Hindi Krishna Poet) Revision (Page 10 of 14)

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चैतन्य अथवा गौड़िया संप्रदाय

1 गदाधर भट्ट

देश के प्रसिद्ध कृष्ण भक्त चैतन्य महाप्रभु के गौड़िया संप्रदाय के प्रसिद्ध कवि गदाधर भटट ने कृष्ण के साथ-साथ माँ यशोदा और नंद बाबा की भी श्रद्धापूर्वक वंदना की है। कृष्ण-भक्ति संबंधी साहित्य के अंतर्गत उन्होंने फाग (होली) झूले के भी सुंदर पद रचे हैं।

प्र्रसिद्ध है कि ये चैतन्य महाप्रभु को भागवत सुनाया करते थे। ’भागवत सुधा बरखै वदन, काहू को नाहिंन दुखद’ से प्रमाणित भी होता है। अंत में ये चैतन्य महाप्रभु के शिष्य हो गए। संस्कृत के गंभीर पंडित थे, अत: इनकी रचनाओं में संस्क

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निम्बार्क संप्रदाय

1 श्री भटट- निम्बार्क संप्रदाय के थे। इनके गुरु का नाम था कैशव काश्मीरी। इनका जन्मकाल सं. 1595 अनुमति है।

2 स्वामी हरिदासजी- के प्रसिद्ध भक्तों में स्वामी हरिदास का नाम प्रसिद्ध है जिन्होंने बाद में ’हट्‌टी संप्रदाय’ नाम से अपना स्वतंत्र संप्रदाय स्थापित किया है। स्वामी हरिदास अकबर के राज-गायक तानसेन के गुरु माने जाते हैं। उनका संपूर्ण काव्य भारतीय संगीत-शास्त्र की राग-रागिनियों से संबंध है। इसमें भावपक्ष की प्रधानता है।

हरिदास जी सखी संप्रदाय के संस्थापक थे। इनका कविता काल संवत्‌ 1

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