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भक्तिकालीन फुटकर कवि

कबीर, तुलसीदास, सूरदास, जायसी, मीराबाई जैसी काव्य प्रतिभाएँ भक्तिकालीन प्रासाद की आधारशिला के रूप में रहीं है। राजनैतिक स्थिरता और राज्याश्रय ने काव्य-सृजन को प्रेरणा दी। प्रबंध काव्य और मुक्तक रचनाओं के दव्ारा खुल गए। भक्त कवियों की दिव्य वाणी के समानान्तर पहले से चली आ रही परंपरा भी गतिमान रही जिसमें रहीम, नरहरि, गंग, नरोत्तम दास आदि अनेक भावुक कवियों ने काव्य क्षेत्र में अपना कौशल दिखाया हैं। ऐसे कुछ कवियों का परिचय निम्न प्रकार है।

भक्तिकाल के अन्य प्रमुख फुटकर कवि इस प्रकार हैं-

अकबर के दरबारी

1 महापात्र नरहरि बंदीजन अरुनी- फतेहपुर का निवासी व्यक्ति सम्राट… (531 more words) …

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चैतन्य अथवा गौड़िया संप्रदाय

1 गदाधर भट्ट

देश के प्रसिद्ध कृष्ण भक्त चैतन्य महाप्रभु के गौड़िया संप्रदाय के प्रसिद्ध कवि गदाधर भटट ने कृष्ण के साथ-साथ माँ यशोदा और नंद बाबा की भी श्रद्धापूर्वक वंदना की है। कृष्ण-भक्ति संबंधी साहित्य के अंतर्गत उन्होंने फाग (होली) झूले के भी सुंदर पद रचे हैं।

प्र्रसिद्ध है कि ये चैतन्य महाप्रभु को भागवत सुनाया करते थे। ’भागवत सुधा बरखै वदन, काहू को नाहिंन दुखद’ से प्रमाणित भी होता है। अंत में ये चैतन्य महाप्रभु के शिष्य हो गए। संस्कृत के गंभीर पंडित थे, अत: इनकी रचनाओं में संस्कृतगर्भित पदावली खूब मिलती है।

2 सूरदास-गौड़ी संप्रदाय के… (83 more words) …

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