CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-हिन्दी कृष्ण-काव्य (Hindi Krishna Poet) Revision (Page 1 of 14)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) covering entire 2018 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or choose a topic to view more samples.

Rs. 450.00 or

कृष्ण काव्य - परिचय

  • स्वामी शंकराचार्य दव्ारा स्थापित अद्धैत दर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में सगुण भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। भारतीय पौराणिक साहित्य में विशेष रूप से विष्णु पुराण और भागवत पुराण से सगुण भक्ति को प्रेरणा मिली। श्रीमद् भगवद्गीता में तो स्वयं भगवान कृष्ण ने स्वीकार किया है-

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजामयहम्‌।।

  • कृष्णभक्त अपने आराध्य श्रीकृष्ण को पुरुषोत्तम कहते हैं तथा उन्हें दिव्य गुणों से युक्त मानते हैं। पुरुषोत्तम रूप में ही आनन्द का आविर्भाव होता

… (3461 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

आदिकालीन कृष्ण काव्य

हिन्दी का आदिकालीन मुख्यत: वीरतामूल काव्य रचनाआंे से युक्त था किंतु श्रृंगार का भी यहाँ र्प्याप्त मात्रा में अंकन किया गया। श्रृंगार का मुख्य आलंबन रहे-राधा-कृष्ण और उनकी प्रेम लीलाएँ जो मूलत: लोक परंपरा की देन थीं। जयदेव का ’गीत-गोविंद’ ही इनका पथ-प्रदर्शक था?

… (286 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

भक्तिकालीन कृष्ण काव्य

  • कृष्ण काव्य का सर्वाधिक गुण-मात्रा भक्ति काल में विकास हुआ मिलता है। इसमें एक और तुलसी जैसे रामभक्त कवियों ने इसको अपनाया (यथा ’कृष्ण गीतावली’) तो दूसरी ओर कबीर और जायसी जैसे निर्गुण कवियों ने भी इनको अपने-अपने ग्रंथों में यदा-कदा उल्लखित किया। कृष्णभक्ति शाखा तो इससे पूर्ण-रूपेण ओत-प्रोत है ही।

  • महाकवि सूरदास इसी के सर्वप्रधान और कृष्ण काव्य के सनातन प्रणेता हैं। प्रमाण है- उनकी दस हजार से भी अधिक पदों की गीतिकाव्य रचना ’सूरसागर’। सूरदास ने गोपाल कृष्ण के गोकुल, वृन्दावन और मथुरा

… (1544 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In