Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 365 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2016 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 400.00 or

अष्ट छाप के अन्य कवि - परमानंदास

  • परमानन्दास अष्टछाप के कवियों में प्रमुख स्थान रखते हैं। इनका जन्म कन्नौज (उत्तर प्रदेश) में एक निर्धन कान्यकुबज ब्राह्यण-परिवार में हुआ था। इन्होंने भी अपनी रचनाओं में अपने विषय में कुछ नहीं लिखा हैं। साम्प्रदायिक अनुश्रुतियों के आधार पर इन्हें वल्लभाचार्य से 15 वर्ष छोटा कहा जाता है, अत: इनका जन्म काल 1493 ई. स्थिर होता है। बाल्यकाल से ही उनकी रुचि भगवद् भक्ति में थी अत: अल्पायु में ही इन्होंने भक्ति मार्ग को ग्रहण कर लिया। काव्य-रचना की ओर ध्यान जाना स्वाभाविक था। इन्होंने गृहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं किया अर्थात आजीवन अविवाहित रहे और न धनार्जन के लिए कोई… (402 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

उपलब्धियाँ और महत्व

  • ध्यान दें तो, कृष्ण-काव्य, प्रमुख प्रवृतियाँ अथवा विशेषताएँ प्रकारांतर से इसकी उपलब्धियाँ ही कही जाएगी। विभिन्न संप्रदायों से बद्ध और स्वतंत्र दोनों के रूपों में रहकर इन कवियों ने जिस विपुल और गुणयुक्त गीतिकाव्य का सृजन किया है, वह बेजोड तो है ही, साथ ही भावी पीढ़ियों के लिए एक अनमोल देन भी है। सामान्यत सूरादि इन कवियों को शुक्ल जी जैसे आलोचकों ने समुचित स्थान नहीं दिया है, यद्यपि आज तुलसी के प्रति उनका अतिशय पक्षपात का भाव और हठवादिता भी छिपे नहीं है। वस्तुत: भगवान को रिझाने के लिये इन भक्त-कवियों के तल्लीन हृदयोद्गार स्वयं ही श्रेष्ठतम काव्य… (188 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

Sign In