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दव्वेदी युग

  • दव्वेदी युग-संवत्‌ 1950 से लेकर संवत्‌ 1975 तक का समय हिन्दी साहित्य के इतिहास में दव्वेदी युग के नाम से संबोधित किया जाता है। इस युग की सूची साहित्य चेतना के सूत्रधार प्रस्तुत यंग के महान पुरुष महावीर प्रसाद दव्वेदी थे। इस युग का कोई साहित्य आंदोलन ऐसा नहीं था जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनसे प्रभावित न हुआ हो। भारतेन्दु काल जन-जागरण का प्रारंभिक काल था। उस समय जनता के सामने राष्ट्रीयता का स्वरूप नहीं हो पाया था। दव्वेदी युग में राष्ट्रीय भावना और आदर्श की भावना जनमानस में आई थी। स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवंकानंद, स्वामी… (145 more words) …

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स्वच्छंदतावाद के अन्य प्रमुख कवि

स्वच्छंदतावाद कवियों में प्रमुख है।

हरिवंशराय बच्चन-’उमर खय्याम’ की रुबाइयों के अनुवाद में बच्चन ने हिन्दी जगत का आध्यात्मिक मदिरा की मस्ती से परिचय कराया। उनके काव्य में तन्मयता हैं। प्रेम और हाला की मादकता में उन्होंने सांसारिक वास्तविकता की दृष्टि से ओझल नहीं होने दिया है। इनकी प्रसिद्ध रचना मधुशाला ने लोकप्रियता की ऊँचाइयों को छुआ। बच्चन जी के हालावद में प्रेम, आशा की नई किरणें दिखाई देती हैं।

उनकी रचनाएँ- मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल अंतर, विकल-विश्व, सतरंगिनी दो चट्टानें, मिलन यामनी, आरती और अंगारे, धार के इधर-उधर, बंगाल का अकाल।

मधुकलश के कवि… (241 more words) …

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