CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-दव्वेदी -युग (Dwvedi -Yug) Revision (Page 4 of 4)

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स्वच्छंदतावाद और उसके प्रमुख कवि

  • प्रभाव-साहित्य में स्वच्छंदतावादी प्रवृत्ति 18वीं सदी के अंतिम दशक एवं 19वीं सदी के प्रारंभ में आई। विद्धान इसका संबंध 1789 की राज्यक्रांति से मानते हैं। हिन्दी साहित्य में यह प्रवृत्ति 1930 के आसपास दिखाई देती है। स्वच्छंदतावाद ने छायावादी कविता को प्रभावित किया हैं।
  • विशेषता-स्वच्छंदतावादी काव्य चेतना की प्रमुख प्रवृत्ति एवं विशेषता उसमें आत्मतत्व के रूप में विद्यमान विद्रोह का प्रबल स्वर है। स्वच्छंदतावाद काव्यधारा में मध्ययुगीन रोमाचंक प्रवत्तियों के दर्शन भी होते हैं। आरंभ शुक्ल

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स्वच्छंदतावाद के अन्य प्रमुख कवि

स्वच्छंदतावाद कवियों में प्रमुख है।

हरिवंशराय बच्चन-’उमर खय्याम’ की रुबाइयों के अनुवाद में बच्चन ने हिन्दी जगत का आध्यात्मिक मदिरा की मस्ती से परिचय कराया। उनके काव्य में तन्मयता हैं। प्रेम और हाला की मादकता में उन्होंने सांसारिक वास्तविकता की दृष्टि से ओझल नहीं होने दिया है। इनकी प्रसिद्ध रचना मधुशाला ने लोकप्रियता की ऊँचाइयों को छुआ। बच्चन जी के हालावद में प्रेम, आशा की नई किरणें दिखाई देती हैं।

उनकी रचनाएँ- मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल अंतर, विकल-विश

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