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दव्वेदी जी का योगदान, भाषा व उपलब्धियाँ

दव्वेदी जी का योगदान-दव्तीय महायुद्ध के समाप्त होने पर ’रोलेट एक्ट’ की प्रतिक्रिया में महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशभर में असहयोग और सताग्रह आंदोलन की धूम मच गई है। इन आंदोलनों की गहरी छाप साहित्य पर पड़ी। इस कार्य में दव्वेदी दव्ारा संपादित सरस्वती पत्रिका का अमूल्य योगदान रहा है।

दव्वेदी जी दव्ारा रचित भाषा -भारतेन्दु और दव्वेदी युग के बीच की पहली विभाजन रेखा भाषा के माध्यम से ही खींची जा सकती हैं। भारतेन्दु युग की गद्य-पद्य की (खड़ी बोली तथा ब्रजभाषा) दो पृथक भाषाओं में से एक (गद्य की खड़ी बोली) भाषा को अपना कर दव्वेदी… (944 more words) …

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स्वच्छंदतावाद और उसके प्रमुख कवि

  • प्रभाव-साहित्य में स्वच्छंदतावादी प्रवृत्ति 18वीं सदी के अंतिम दशक एवं 19वीं सदी के प्रारंभ में आई। विद्धान इसका संबंध 1789 की राज्यक्रांति से मानते हैं। हिन्दी साहित्य में यह प्रवृत्ति 1930 के आसपास दिखाई देती है। स्वच्छंदतावाद ने छायावादी कविता को प्रभावित किया हैं।
  • विशेषता-स्वच्छंदतावादी काव्य चेतना की प्रमुख प्रवृत्ति एवं विशेषता उसमें आत्मतत्व के रूप में विद्यमान विद्रोह का प्रबल स्वर है। स्वच्छंदतावाद काव्यधारा में मध्ययुगीन रोमाचंक प्रवत्तियों के दर्शन भी होते हैं। आरंभ शुक्ल ने रीतिमुक्त काव्यधारा को स्वच्छंदतावाद का पूर्वाभास माना है।
  • कवि-निराला दव्ारा रचित राम की शक्ति पूजा तथा तुलसीदास तथा पंत की… (38 more words) …

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