CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-दव्वेदी -युग (Dwvedi -Yug) Revision (Page 3 of 4)

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दव्वेदी युग के राष्ट्रीयधारा के अन्य कवि

राष्ट्रीयधारा के अन्य कवि निम्न हैं जिनकी कविता में राष्ट्रीय चेतना के स्वर अधिक प्रखरता के साथ उभरे है।

रामधारी सिंह ’दिनकर’ रेणुकर (1935) - हिमालय कविता दिनकर के राष्ट्र-गौरव के प्रति आसक्ति का ज्वलंत प्रमाण है। दिनकर की राष्ट्रीयता में आवेश, संर्घ भाव और हिंसा की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी कविता में युगकालीन वातावरण और परिवेश मिलता है। पूंजीपतियों दव्ारा किए गए शोषण के प्रति उनके मन में रोष है तथा शोषितों के प्रति सहानुभूति की अभिव्यक्ति हुई हैं। ये एक प्रगतिवादी कवि है

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दव्वेदी युग की पत्रिकाएँ

  • दव्वेदी युग की पत्रिकाएँ

    हिन्दी-पत्रिकारिता के विकास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थिति का प्रारंभ होता हैं ’सरस्वती पत्रिका’ के प्रकाशन से। इसका श्रीगणेश जनवरी, सन्‌ 1900 में, इलाहाबाद से हुआ। नागरी प्रचारिणी सभा से संरक्षण मिला था। श्यामुसन्दर दास, राधाकृष्ण दास, जगन्नाथ दास रत्नाकर, कार्तिक प्रसाद खत्री और किशोरीलाल गोस्वामी जैसे विदव्ान इसके संपादक मंडल में थे। सन्‌ 1903 में इसको महानतम संपादक मिला -आचार्य प्रसाद दव्वेदी जिन्होंने सन्‌ 1920 तक इसका योग्यतम संपादन किया।

  • हिन्दी-जगत

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