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दव्वेदी युग के कवि

  • अयोध्यासिंह उपाध्याय- ’हरिऔध की काव्य राष्ट्रीयता की भावनाआंे से ओतप्रोत हें। उन्होंने ब्रजभाषा और खड़ी बोली दोनो में काव्य रचना की। उनका शब्द भंडार विशाल था। हरिऔध जी के शैली में माधुर्य तथा प्रसाद गुण विद्यिमान है। उन्होंने हिन्दी संस्कृत तथा उर्दू के छंदों का सार्थक प्रयोग किया है। मुहावरों का प्रयोग करके भाषा के प्रभाव को बढ़ा दिया है। उनके साहित्य में लोकोपकारी भावना को महत्व दिया गया हैं।
  • इनकी रचनाए ंनिम्न हैं-
  1. काव्य में- प्रिय प्रवास, (महाकाव्य) में उन्होंने कृष्ण का चरित्र-चित्रण लोकनायक महापुरुष के रूप में किया हैं। वैदही वनवास, चुभते चौपदे, चोखे चौपदे रचित किया… (324 more words) …

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दव्वेदी युग की पत्रिकाएँ

  • दव्वेदी युग की पत्रिकाएँ

    हिन्दी-पत्रिकारिता के विकास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थिति का प्रारंभ होता हैं ’सरस्वती पत्रिका’ के प्रकाशन से। इसका श्रीगणेश जनवरी, सन्‌ 1900 में, इलाहाबाद से हुआ। नागरी प्रचारिणी सभा से संरक्षण मिला था। श्यामुसन्दर दास, राधाकृष्ण दास, जगन्नाथ दास रत्नाकर, कार्तिक प्रसाद खत्री और किशोरीलाल गोस्वामी जैसे विदव्ान इसके संपादक मंडल में थे। सन्‌ 1903 में इसको महानतम संपादक मिला -आचार्य प्रसाद दव्वेदी जिन्होंने सन्‌ 1920 तक इसका योग्यतम संपादन किया।

  • हिन्दी-जगत को जितनी साहित्य-संपदा और श्रेष्ठ साहित्यकार ’सरस्वती’ ने दिया हैं, जितना प्रचार-प्रसार किया है, उतना अन्य किसी में नहीं। ’सरस्वती’ में छपना उस समय के… (163 more words) …

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