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दव्वेदी युग के राष्ट्रीय काव्यधारा के कवि

मैथलीशरण गुप्त और राष्ट्रीय काव्यधारा- गुप्त जी का जन्म सन्‌ 1886 में चिरगांव जिला झांसी में हुआ। वे वैष्णव विचारधारा के कवि थे। उनके काव्य में संपूर्ण राष्ट्रीय भावनाओं का प्रतिनिधित्व होने के कारण उन्हें ’राष्ट्रकवि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया है। वे गांधी जी तथा नेहरू जी की विचारधार से प्रभावित थे। उनके काव्य में भी इसके दर्शन होते हैं। दव्वेदी युग के केन्द्र जिससे दव्वेदी युग का साहित्य प्रभावित हुआ मैथलीशरण गुप्त हैं। गुप्त जी का काव्य रचना का क्षेत्र अत्यंत व्यापक रहा हैं। उन्होंने अपने समय की प्रचलित सभी काव्यधाराओं और शैलियों में रचना की।… (760 more words) …

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दव्वेदी युग के राष्ट्रीयधारा के अन्य कवि

राष्ट्रीयधारा के अन्य कवि निम्न हैं जिनकी कविता में राष्ट्रीय चेतना के स्वर अधिक प्रखरता के साथ उभरे है।

रामधारी सिंह ’दिनकर’ रेणुकर (1935) - हिमालय कविता दिनकर के राष्ट्र-गौरव के प्रति आसक्ति का ज्वलंत प्रमाण है। दिनकर की राष्ट्रीयता में आवेश, संर्घ भाव और हिंसा की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी कविता में युगकालीन वातावरण और परिवेश मिलता है। पूंजीपतियों दव्ारा किए गए शोषण के प्रति उनके मन में रोष है तथा शोषितों के प्रति सहानुभूति की अभिव्यक्ति हुई हैं। ये एक प्रगतिवादी कवि हैं उन्होंने दलित वर्ग को उन्नत करने की प्रेरणा दी है। ये रक्त… (473 more words) …

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