CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-दव्वेदी -युग (Dwvedi -Yug) Revision (Page 1 of 4)

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दव्वेदी युग

  • दव्वेदी युग-संवत्‌ 1950 से लेकर संवत्‌ 1975 तक का समय हिन्दी साहित्य के इतिहास में दव्वेदी युग के नाम से संबोधित किया जाता है। इस युग की सूची साहित्य चेतना के सूत्रधार प्रस्तुत यंग के महान पुरुष महावीर प्रसाद दव्वेदी थे। इस युग का कोई साहित्य आंदोलन ऐसा नहीं था जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनसे प्रभावित न हुआ हो। भारतेन्दु काल जन-जागरण का प्रारंभिक काल था। उस समय जनता के सामने राष्ट्रीयता का स्वरूप नहीं हो पाया था। दव्वेदी युग में राष्ट्रीय भावना और आदर्श की भावना जनमानस में आई थी।

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दव्वेदी जी का योगदान, भाषा व उपलब्धियाँ

दव्वेदी जी का योगदान-दव्तीय महायुद्ध के समाप्त होने पर ’रोलेट एक्ट’ की प्रतिक्रिया में महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशभर में असहयोग और सताग्रह आंदोलन की धूम मच गई है। इन आंदोलनों की गहरी छाप साहित्य पर पड़ी। इस कार्य में दव्वेदी दव्ारा संपादित सरस्वती पत्रिका का अमूल्य योगदान रहा है।

दव्वेदी जी दव्ारा रचित भाषा -भारतेन्दु और दव्वेदी युग के बीच की पहली विभाजन रेखा भाषा के माध्यम से ही खींची जा सकती हैं। भारतेन्दु युग की गद्य-पद्य की (खड़ी बोली तथा ब्रजभाषा) दो पृथक भाषाओं में से एक (ग

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