Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 483 key topics of CBSE-NET (UGC) Hindi Literature (Paper-II & Paper-III) covering entire 2017 syllabus. All the updates for one year are also included. View Features or .

Rs. 450.00 or

छायावाद की प्रवृत्तियाँ

उत्तर छायावाद में तीन प्रमुख काव्य प्रवृत्तियाँ देखने को मिलती हैं-

  • प्रगतिवादी काव्यधारा- (आरंभ 1936 ई. से)
  • निराला- कुकुरमुत्ता, गर्म पर्काड़ी, खजोहरा, प्रेमसंगीत, मास्को डायलॉग्स तथा नए पत्ते।
  • नागार्जुन-बादल को घिरते देखा, पाषाणी, चंदना, सिन्दूर तिलकित भाल, तुम्हारी दंतुरित मुस्कान।
  • केदारनाथ अग्रवाल-फूल नहीं रंग बोलते हैं, युग की गंगा।
  • शिवमंगल सिंह सुमन-मास्को अब भी दूर हैं।
  • अन्य प्रमुख कवि हैं- शंकर शैलेन्द्र, त्रिलोचन, रामेश्वर शुक्ल ’अचल’ रामधारी सिंह दिनकर, नरेन्द्र शर्मा मुक्तिबोध आदि।

छायावाद की विशेषताएँ

छायावाद का जन्म

इस समय तक हिन्दी भाषा में प्रौढ़ता आ चुकी थी। कवीन्द्र रवीन्द्र भारतीय साहित्याकाश में दैदीप्यमान नक्षत्र की तरह उदित हो चुके थे। उनकी गीताजंलि (बांगला में लिखित) देश के साहित्यकारों के लिए प्रेरणा-बिन्दु बन गई थीं।

छायावाद का जन्म प्रसाद के काव्य आँसू (1927) से माना जाता है। सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग मुकुटधर पाण्डेय ने किया था। छायावाद को ’मिस्टिज्मि’ (घना) के अर्थ में प्रयुक्त किया गया था। प्रारंभ में छायावाद व्यंग्यार्थ में प्रयोग किया गया था। परन्तु छायावादी कवियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।

छायावादी काव्य गीतांजलि की विशेषताएँ

  • व्यक्तिगत स्वाधीनता की भावना
  • रहस्यात्मकता… (83 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

f Page
Sign In