CBSE-NET (Based on NTA-UGC) Hindi Literature (Paper-II) हिन्दी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)-छायावाद और उसके बाद (Chhayavaad and Later) Revision (Page 8 of 11)

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प्रयोगवाद युग के कवि

प्रमुख प्रयोगवादी कवि- नागार्जुन, डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन, रांगेय राघव, नरेन्द्र शर्मा, नेमिचंद जैन, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, गिरिजाकुमार माथुर, शमशेर बहादुर सिंह, मुक्तिबोध, भारत-भूषण अग्रवाली, प्रभाकर माचवे आदि। गजानन माधव मुक्तिबोध प्रगतिवादी काव्यधारा के मुख्य कवि हैं। छायावाद के कुछ कवियों में प्रगतिवादी विचारधारा प्रबल रूप से प्रकट हुई हैं।

यहाँ कुछ प्रयोगवादी कवियों का परिचय दिया जाता हैं। जो निम्न हैं-

सच्चिदांनद ह

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प्रयोगवाद युग की प्रमुख प्रवृत्तियाँ

प्रगतिवादी कविता की मुख्य प्रवृत्तियाँ

  • रूढ़ि का विरोध- प्रगतिवादी कवि ने मिथ्या परंपराओं, प्राचीन रूढ़ियों और अंध विश्वासों का डटकर विरोध किया है। भगवान में उनकी आस्था नहीं हैं अर्थात्‌ वह नास्तिक हैं।
  • शोषण के प्रति रोष- शोषितों की दयनीय दशा का चित्रण-इस बारे में अंचल जी कहते हैं-ं

यह नस्ल जिसे कहते मानव, कीड़ों से आज गई बीती।

  • बुझ जाती तो आश्चर्य न था, हैरत है पर कैसे जीती।।
  • क्रांति की भावना हैं।
  • सामाजिक जीवन का यथार्थचित्रण किया गया हैं
  • मानवतावाद- कवि संसार के पीड़ित लोगों से सहानुभूति

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